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बराबर के इंसानों में समानता की तुलना पर नहीं होता द्वेष : नरेंद्र

7 वर्ष पहले
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बराबरके इंसानों के बीच समानता की तुलना होती है। असमानता के बीच समानता की तुलना नहीं की जा सकती। यहीं से द्वेष की शुरुआत होती है। क्योंकि जब दो समान लोगों के बीच भेदभाव किया जाता है, तो द्वेष की भावना का जन्म होता है। जब असमान लोगों के बीच तुलना होती है तो दया का भाव पैदा होता है। ये बात राजनीतिक विषय विशेषज्ञ राज्य मास्टर ट्रेनर नरेंद्र कुमार ने कही। वे सोमवार को जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र (डाइट) में \\\"समानता\\\' टाॅपिक पर नवनियुक्त लेक्चर्स को ट्रेनिंग दे रहे थे।

उन्होंने समानता के टाॅपिक का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि आप ट्रेन का टिकट के लिए लाइन में खड़े हैं और दूसरा यात्री बिना लाइन के ही टिकट लेने लगेे, तो आपको द्वेष का भाव पैदा होता है। क्योंकि वह भी आपके समान है। आप लाइन में लगे हैं, वह बिना लाइन के टिकट ले रहा है। आप विरोध करने के तैयार हो जाते हैं, लेकिन यदि कोई बुजुर्ग महिला बिना लाइन के टिकट लेती है तो, आप विरोध नहीं करते। क्योंकि उसमें और आप में समानता नहीं है। नरेंद्र कुमार ने कहा कि ट्रेनिंग राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के तत्वावधान में दी जा रही है।

इसमें पानीपत, सोनीपत करनाल के 55 लेक्चरर ने भाग लिया है। ट्रेनिंग के दौरान लेक्चर्स को सिखाया कि छात्रों को इस प्रकार से उदाहरण दें कि टॉपिक समझ में आए। नरेंद्र कुमार ने बताया कि मंगलवार को मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व लोकतंत्र में नागरिकों को प्राप्त अधिकार पर चर्चा की जाएगी।

पानीपत. राजनीतिविज्ञान विषय पर आयोजित प्रशिक्षण शिविर में उपस्थित प्राध्यापक।