अर्श ने जीता वाेटर्स चॉइस अवॉर्ड
9 सूक्ष्म उपकरणों से बनाया \\\"टॉक\\\'
अमेरिकामें आयोजित गूगल साइंस फेयर अवाॅर्ड में पानीपत का अर्श शाह दिलबागी \\\"वोटर्स चॉइस अवाॅर्ड\\\' जीतने में सफल रहा। थर्मल निवासी अर्श एशिया के इकलौते ऐसे छात्र हैं, जिन्हें गूगल ने साइंस फेयर में सिलेक्ट किया था। पैरालिसिस पीड़ितों के लिए सांस से बोलने वाली तकनीक \\\"टॉक\\\' बनाने के कारण अर्श को गूगल ने साइंस फेयर के टॉप-18 में सिलेक्ट किया था। ऑनलाइन वोटर्स चॉइस में अर्श के प्रोजेक्ट को लोगों ने पसंद की।
युवाओं में विज्ञान संबंधी खोज को बढ़ावा देने के लिए गूगल ने वर्ष 2011 में गूगल साइंस फेयर पुरस्कार शुरू किया था। इस वर्ष 90 देशों से हजारों आवेदन मिले। इसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, रूस, अमेरिका, यूक्रेन और ब्रिटेन के टाॅप-18 फाइनलिस्ट का चुनाव हुआ था। वोटर्स चॉइस अवाॅर्ड मिलने पर अर्श को 10 हजार अमेरिकी डॉलर (6 लाख 9 हजार 800 रुपए) का नगद इनाम, स्मृति चिह्न, 3 इंच की गूगल क्रोम बुक, एक टेबलेट, माइंडस्ट्रोम ई-3 किट, बैग, गूगल ट्रैक सूट सहित अन्य पुरस्कार दिए गए।
एक साल की मेहनत से अर्श ने \\\"टॉक\\\' तैयार किया, जिससे विश्व के 10 करोड़ लोगों को फायदा पहुंचेगा। अर्श की मां रितु दिलबागी डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल हैं। अर्श इसी स्कूल का छात्र है।
अर्श ट्रॉफी लिए (रेड टी-शर्ट पहने हुए बीच में)।
पानीपत के डीएवी पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले 16 वर्षीय अर्श शाह दिलबागी ने लगभग 9 सूक्ष्म उपकरणों से एक यंत्र बनाया जिसका नाम टॉक है। टॉक एक संवर्धी और वैकल्पिक संप्रेषण यंत्र है। यह स्मार्टफोन जितने वजन का है। इसमें नाक और मुंह के पास सेंसर लगाया गया है। हर अक्षर नाक से निकलने वाले सांस से निर्धारित होगा। हालांकि यह यंत्र पहले से मौजूद है, लेकिन यह बहुत अधिक महंगा है। टॉक इसकी तुलना में सस्ता है। यह 100 यूएस डॉलर्स में मिल सकता है। यह बोलने की गति को 300 फीसदी तक बढ़ाता भी है।