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मंदिर में बैठे हनुमान स्वरूप, 40 दिन का ब्रह्मचर्य व्रत

7 वर्ष पहले
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पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती गई श्रद्धा

पानीपत | अबकमाने की चिंता है और घर-गृहस्थी की। ध्यान हनुमानजी की भक्ति में है और चोला भी ठीक वैसा ही है। कहीं लंगोट तो कहीं भगवा या फिर सफेद वस्त्र धारण कर ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करते हुए शहर में 800 के करीब हनुमान स्वरूप बने हैं। ये सब श्रद्धालु 40 दिन तक मंदिरों में ही रहेंगे। हनुमान जी के आदर्शों का प्रचार-प्रसार कर समाज में फैली कुरीतियों को दूर करना इनका उद्देश्य है।

करीब 85 साल पहले शुरू हुई हनुमान स्वरूप धारण करने की परंपरा को आज भी बखूबी निभाया जा रहा है। वर्तमान में पाकिस्तान के लैय्या जिले से पानीपत में आए लैय्या समाज के लोगों द्वारा इसे विशेष महत्व दिया जाता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक विभिन्न आयु वर्ग के पांच सौ के करीब श्रद्धालु हनुमान स्वरूप धारण करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंदिरों में बैठे हैं। समय के साथ श्रद्धा बढ़ी और सनातन धर्म से जुड़े अन्य वर्ग के लोग भी इसमें शामिल होते गए। हनुमान स्वरूप को बड़े सम्मान की नजर से देखा जाता है। हनुमान स्वरूप धारण ब्रह्मचर्य के कठोर नियमों का पालन ये करते हैं। हनुमान स्वरूप दशहरा से 40 दिन पहले धारण किया जाता है।

24घंटे में एक बार भोजन

हनुमानस्वरूप धारण करने वाले श्रद्धालु 24 घंटे में एक बार अन्न ग्रहण कर रहे हैं। नंगे पैर रहते हैं और जमीन या फिर लकड़ी के तख्त पर सोते हैं। हनुमान की लाल लंगोटी कसना अन्य नियमों का विशेष पालन किया जा रहा है। 40 दिन तक मंदिर ही ठिकाना रहेगा। अष्टमी से लेकर दशहरे के अगले दिन भरत मिलाप पर नगर परिक्रमा का दौर चलता है। इस दौरान हनुमान स्वरूप ढोल नगाड़ों के साथ भक्तों के घर जाएंगे। भक्त अपनी पिछली मन्नत पूरी होने पर हनुमान स्वरूप को घर पर आमंत्रित कर उनकी खूब आवभगत करते हैं। दशहरे से दो दिन बाद हरिद्वार पहुंचकर गंगा किनारे हवन के साथ इसका समापन होता है।

40 दिन हनुमान स्वरूप धारण कर ब्रह्मचर्य का पालन करने की परंपरा पानीपत, सोनीपत और सूरत में ज्यादा है। अन्य जगह के लोगों को तो इसकी पूरी जानकारी भी नहीं है। उनके रिश्तेदार इत्यादि विशेष तौर पर इन दिनों में उनके यहां पहुंचकर ब्रह्मचर्य रूप देखते हैं। -साहिल रामदेव, हनुमानस्वरूपधारी

प|ीकी भी नहीं देखते सूरत

जिसतरह श्रद्धालु भगवान से मन्नत मांगते हुए प्रसाद बांटते हैं, कांवड़ लाते