भारी अमला, पर सफाई का संकट
सरकारी कोष में करोड़ों रुपए का रेवेन्यू देने वाला औद्योगिक नगर में गंदगी
2 अक्टूबर को कैसे मनेगा सफाई दिवस
भास्करन्यूज | पानीपत
देश2 अक्टूबर को सफाई दिवस मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद झाड़ू लगाएंगे। पानीपत में प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के झाड़ू लगाने की जरूरत नहीं, उनका आना ही काफी है। आने की सूचना भर से ही कम से कम शहर की सड़कें जरूर चमक जाएंगी। आज भी मुख्यमंत्री हमारे शहर रहे हैं। शुक्रवार को आने भर की सूचना से जीटी रोड किनारे सफाईकर्मी झाड़ू लगाते देखे गए। सच्चाई ये है कि सरकारी कोष में करोड़ों रुपए का रेवेन्यू देने वाला औद्योगिक नगर पानीपत कूड़े के ढेर पर है। 728 सफाई कर्मचारियों की भारी-भरकम टीम भी शहर को साफ रखने में नाकाम है। रही-सही कसर शहरवासी पूरा कर देते हैं- नाली, खाली प्लॉट, सड़क पार्क के किनारे कूड़ा डालकर। यहां तो रेलवे लाइन किनारे ही नहीं शहर के मंदिरों स्कूल परिसरों में भी कूड़ा डाला जा रहा है।
शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए 299 कर्मचारी नगर निगम में हैं। 429 वे कर्मचारी हैं, जो ठेकेदार के अधीन थे। इन्हें नगर निगम में समायोजित करने की औपचारिकता अभी पूरी नहीं हो पाई है।
पक्के कच्चे 728 कर्मचारी शहर से गंदगी निकालने में असफल हो रहे हैं। इतने कर्मचारी कहां काम करते हैं, यह दिखाई नहीं देता। कुछ दिखते हैं, लेकिन उन पर शहरवासी भारी पड़ते हैं। तहसील कैंप सहित जहां खुली नाली हैं, लोग इन्हीं में कूड़ा डालते हैं और दोष नगर निगम को देते हैं कि सफाई नहीं होती।