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जन्मजात विकारों को दूर करेगी प्री कंसेप्शन केयर योजना
बच्चोंको जन्मजात विकारों से बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से सरकारी अस्पताल में प्री-कंसेप्शन केयर पैकेज योजना शुरू की गई है। इसके तहत महिला की गर्भावस्था को प्रभावित करने वाले कारकों की पहचान कर, उसका उपचार किया जाएगा। अस्पताल में निश्चित समय पर गर्भवती महिला की जांच होती रहेगी, ताकि जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य का पता चलता रहे।
इसतरह होगा उपचार : आशावर्कर एवं एएनएम गांव-गांव में जाएंगी और महिलाओं को योजना के प्रति जागरूक करेंगी। वे फ्री एंबुलेंस की सेवा लेकर महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर लेकर जाएंगी। जहां पर उनकी जांच होगी। स्कूल हैल्थ के माध्यम से हो रहा उपचार- वहीं जन्मजात बीमारियों जैसे दिल में छेद, होंठ और तालवा कटा होने की बीमारियों का उपचार स्वास्थ्य विभाग स्कूल हैल्थ के माध्यम से कर रहा है। विभाग की ओर से अब तक 1 बच्चे का उपचार हो चुका है। जबकि 10 बच्चों का उपचार शुरू हो चुका है।
एचबी, ब्लड शुगर, पेशाब, वीडीआरएल, टीएसएच, एचआईवी पति प|ी के ब्लड ग्रुप की जांच, महिला के वजन की जांच की जाएंगी। इसके लिए चार मातृ शिशु स्वास्थ्य विंग, एमसीएचए, प्री कंसेप्शन केयर पैकेज, इंफेंट यंग चाइल्ड फीडिंग काउंसलिंग सेंटर, कुपोषण से बचाव के लिए कुपोषण पुनर्वास केंद्र, नवजात के उपचार के लिए न्यू बोर्न स्क्रीनिंग लैब बनाई जाएंगी।
प्रीकंसेप्शन केयर क्यों : मांके प्रेग्नेंसी से पहले सावधानियां बरते जाने के कारण कई मामलों में गर्भवती महिला को यह पता ही नहीं चल पाता कि गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास हो रहा है या नहीं। लेकिन जब पता चलता है, तब तक देर हो चूकी होती है। जब बच्चा जन्म लेता तो उसके कई प्रकार किटे विकार होते है। जैसे कटे-फटे होंठ, ताल, दिल में छेद, क्रिटिसिज्म में विकृति, मस्तिष्क का हर्निया, कम वजन, मंद बुद्धि, आदि होते है। इन विसंगतियों से बच्चें को बचाने के लिए विभाग ने यह प्री कंसेप्शन केयर योजना शुरू की है।
प्री कंसेप्शन योजना के तहत जच्चा और बच्चा दोनों का लाभ मिलता है। इस योजना से शिशु मृत्यु दर कम करने के साथ जन्मजात विकारों को दूर करने में विभाग ने यह सुविधा शुरू की है। -डाॅ.नवीन सुनेजा, डिप्टीसिविल सर्जन जिला अस्पताल
गर्भावस्था को प्रभावित करने वाले कारक जैसे पोषण का स्तर, फॉलिक एसिड और विटामिन की कमी होना, पुरानी बीमारियां मिर्