पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • जीरो इफेक्ट और जीरो डिफेक्ट वाले इंजीनियर बनें : प्रो. चौधरी

जीरो इफेक्ट और जीरो डिफेक्ट वाले इंजीनियर बनें : प्रो. चौधरी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
इंजीनियर्स-डेके अवसर पर एपिट (एशिया पेसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉरमेशन एंड टेक्नोलॉजी) एसडी इंडिया में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पानीपत रिफाइनरी से प्रोडक्शन डीजीएम टीके मुखर्जी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलिकम्युनिकेशन इंजीनियर्स और इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियर्स चैप्टर्स के छात्रों ने एसेंबलिंग, डीबगिंग, वीडियो मेकिंग ऑन थीम-वी प्राउड टू बी इंडियन क्विज कंपीटिशन में टीम के तौर पर भाग लिया।

भारतर| अभियंता डॉ. एम. विश्वेश्वरैया की याद में मनाया जाता है इंजीनियर्स-डे: सरडॉक्टर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर, 1860 को बैंगलोर के चिकबल्लापुर में हुआ था। 15 वर्ष की आयु में उनके पिता का देहांत हो गया था। 1881 में डॉ. विश्वेश्वरैया ने सेंट्रल कॉलेज, बैंगलोर से कला में स्नातक उपाधि ली और इंजीनियरिंग कॉलेज, पुणे से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 1955 में डॉ. विश्वेश्वरैय्या को सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत र| से नवाजा गया। 14 अप्रैल 1962 को उनकी मृत्यु हो गई थी।

निदेशक डॉ. आरके चौधरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त को लाल किले से देश के इंजीनियर्स के लिए कही गई बात को दोहराया। उन्होंने कहा इंजीनियर्स जीरो इफेक्ट-जीरो डिफेक्ट\\\' वाला उत्पाद तैयार करें ताकि वह उत्पाद जहां भी जाए, पर्यावरण पर उसका कोई नकारात्मक प्रभाव पड़े और किसी कमी के कारण वह वापिस भी आए। साथ ही उन्होंने हुनर विकास के साथ-साथ हुनर स्थानांतरण पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रिफाइनरी प्रोडक्शन के डीजीएम कोलकाता विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियर टीके मुखर्जी ने भावी अभियंताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सही मायने में समाज देश की सेवा में इंजीनियर्स का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने विद्यार्थियों के समक्ष इंजीनियरिंग क्षेत्र की चुनौतियों का जिक्र करते हुए गुणवत्तापरक शिक्षा की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ उसका अधिक से अधिक अभ्यास करना चाहिए।

्इसी से आधुनिक युग में अपने क्षेत्र की मांगों को पूरा करने में सक्षम हो सकेंगे। संस्थान में आकर और बच्चों की रचनात्मकता से उन्हें ऐसा माहौल देखने को म