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भगवान की कृपा से मिलते हैं प्रभु

7 वर्ष पहले
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भगवानकी कृपा से ही भगवान को देखा जा सकता है। भगवान को पाया जा सकता है। भगवान भी परीक्षा लेते हैं। भगवान कहते हैं शरण में जाओ तब कृपा होगी।

श्री राम शिशु विद्या मंदिर, नवां कोट बिरादरी में 55वें वार्षिक उत्सव के चौथे दिन ज्ञानेश्वरी देवी ने भगवान की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के ग्रंथों में लिखा है कि भगवान की शरण में जाने से उनकी कृपा होती है। बिना शरणागति के काम नहीं होता। हमारा मन रूपी बर्तन शुद्ध नहीं है तो कृपा कैसे होगी।

भगवान तो निरंतर कृपा बरसा रहे हैं, लेकिन जीव फिर भी भगवान की शरण में नहीं जा पाता। उन्होंने कहा कि हमारे भीतर सरलता का अभाव है। हमारी सरलता बनावटी है। जीव को शुद्ध भाव से भगवान के पास जाना चाहिए। हमें बाहर से अच्छा बनने से अच्छा भीतर से अच्छा बनना चाहिए।

हम रोज मंदिर जाकर कहते हैं- हे भगवान! तू माता, पिता, तू ही भाई है। शब्दों से संबंध बनाते हैं, हृदय से संबंध नहीं बनाते। सारा दिन पाप करते हैं, शाम को पूजा करते हैं। भगवान से क्षमा मांगते हैं। अगले दिन फिर वही पाप करते हैं। इससे पूर्व हर भगवान नारंग ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और महिला संकीर्तन मंडल से सरला रानी, सिम्मी, सीमा रानी, ममता रानी, किरण सुनीता सोनी ने कीर्तन किया।

इस अवसर पर श्याम सुंदर बतरा, अशोक खुराना, शाम लाल आहूजा, प्रदीप रेवड़ी, प्रवीण रेवड़ी, बाबी रेवड़ी, राजू चावला, संजय जुनेजा, कालू महाराज, जगदीश चुघ, धर्मपाल अरोड़ा, पूर्णचंद नारंग, चरणजीत रेवड़ी, मुकेश खुराना पं. अखिलेश शुक्ला मौजूद रहे।

पानीपत . श्रीरामशिशु विद्यामंदिर नवा कोट बिरादरी के वार्षिकोत्सव के अवसर पर भजन-कीर्तन करते संकीर्तन मंडल के सदस्य मौजूद श्रद्धालु।

ज्ञानेश्वरी देवी