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नहीं चलेगा एफआईआर में देरी का बहाना, कंपनी को देना होगा बीमा

6 वर्ष पहले
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पानीपत | एफआईआरमें देरी पुलिस ने की थी और बीमा कंपनी ने यह कहकर बाइक का क्लेम देने से इनकार कर दिया था कि चोरी के 7 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई। इसलिए क्लेम नहीं बनता। फोरम ने बीमा कंपनी की यह दलील ठुकरा दी और ब्याज सहित क्लेम की राशि देने का आदेश दिया है। पीड़ित को न्याय मिलने में तीन साल लग गए। काबड़ी के संदीप शर्मा की बाइक 18 नवंबर, 2011 की रात सौंदापुर में चोरी हो गई थी। वह मिलन गार्डेन में एक समारोह में गया था।

संदीप शर्मा ने 28 अप्रैल, 2011 से 27 अप्रैल, 2012 तक के लिए अपनी बाइक का ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लि. से 65,570 रुपए का बीमा कराया था। 18 नवंबर, 2011 को बाइक चोरी हो गई। बीमा कंपनी को सूचना देने के बाद मॉडल टाउन थाना में शिकायत की। तलाशी के बाद 25 नवंबर को पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में 7 दिनों की देरी को आधार बनाकर बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया। शिकायतकर्ता की ओर से राष्ट्रीय आयोग में दिए तीन फैसलों का हवाला दिया गया। जिसके आधार पर फोरम ने पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया।

येमिली सीख

{बीमाकराने के बाद एक बात की गांठ बांध लें कि बीमा कंपनी कितनी भी विश्वसनीय क्यों हो, आसानी से क्लेम नहीं देती। आपको कोर्ट भी नहीं जाना पड़ सकता है।

{क्लेम लेना है तो घटना की सूचना पुलिस के साथ ही बीमा कंपनी को जितनी जल्दी हो दें, बहाना बनाकर बीमा कंपनी क्लेम देने से मुकरे न।

केस फाइल करने की तारीख से ब्याज देने का भी आदेश

अध्यक्षजोगिंदर नांदल और सदस्य वीणा की उपभोक्ता कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में देरी, क्लेम देने का आधार नहीं हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि जब यह स्पष्ट हो चुका है कि बाइक की चोरी हुई तो फिर बीमा कंपनी भाग नहीं सकती। चोरी हुई हो या छीना-झपटी, बीमा कंपनी को क्लेम देना ही होगा। कोर्ट ने केस फाइल करने की तारीख से 9 प्रतिशत ब्याज की दर से बीमा की राशि और साथ में कानूनी खर्चा देने का आदेश दिया है।