पानीपत. कई राज्यों में उपचुनाव के नतीजों के बाद भाजपा के हरियाणा चुनाव प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय भले कह रहे हैं कि पार्टी की रणनीति नहीं बदलेगी, हकीकत इससे अलग है। ‘मोदी हवा’ का असर कम होता देख पार्टी ने पैंतरा बदलकर अब जमीनी स्तर पर और काम करने का निर्णय लिया है। प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट जारी करने से पहले पार्टी अध्यक्ष
अमित शाह प्रदेश के सांसदों को बुलाकर उनकी राय ले रहे हैं। जिताऊ प्रत्याशी चुनने के लिए दोबारा से सर्वे भी कराया जा रहा है।
भाजपा के 43 प्रत्याशियों की पहली लिस्ट को लेकर कई एतराज उठे। कई सीटों पर कमजोर प्रत्याशी उतारे जाने के आरोप भी लगे। करनाल के सांसद अश्विनी चोपड़ा ने तो सरेआम कहा कि उनके क्षेत्र में प्रत्याशी तय करने से पहले उनकी राय नहीं ली गई। करनाल में आरएसएस नेता मनोहर लाल खट्टर को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। जिन पर बाहरी होने के आरोप लगाते हुए कई स्थानीय नेताओं ने काले पंपलेट भी दीवारों पर चिपकवाए। इसी वजह से अब शाह सांसदों को बुलाकर चर्चा कर रहे हैं। गुरुवार को कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी को मिलने का समय दिया गया है। कुरुक्षेत्र जिले की थानेसर सीट पर टिकट के लेकर घमासान मचा है।
रिश्तेदार वाला क्लॉज हटेगा?
अमित शाह ने पहले स्पष्ट किया था कि प्रदेश में किसी भी नेता के रिश्तेदार को टिकट नहीं मिलेगा। राजस्थान और यूपी के उपचुनाव में भी यही फॉर्मूला अपनाया। वहां के सांसदों की राय भी नहीं ली गई, लेकिन उपचुनाव के निराशाजनक नतीजों के बाद दूसरी लिस्ट में यह क्लॉज हटने की संभावना है। सुषमा स्वराज अपनी बहन वंदना के लिए सफीदों से, भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मवीर अपने भाई के लिए तोशाम से, गुड़गांव के सांसद राव इंद्रजीत अपनी बेटी आरती राव के लिए रेवाड़ी से और अम्बाला के सांसद रतनलाल कटारिया अपनी पत्नी बंतो कटारिया के लिए टिकट मांग रहे हैं। अब पार्टी का कहना है कि उम्मीदवार जिताऊ होना चाहिए, चाहे कोई भी हो।
पार्टी में टिकट वितरण को लेकर कोई विवाद नहीं। यह सही है कि पार्टी दूसरी लिस्ट पर गंभीरता से विचार कर रही है और 20 सितंबर तक यह लिस्ट जारी होने की उम्मीद है। वैसे उपचुनावों के नतीजों का हरियाणा के विधानसभा चुनाव पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
-रामबिलास शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
(फोटो- रामबिलास शर्मा)