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जगदेव मलिक और सतबीर कादियान का यूटर्न, दोनों अपनी पार्टी में लौटे

7 वर्ष पहले
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पानीपत | कांग्रेस के पूर्व ग्रामीण जिलाध्यक्ष जगदेव मलिक और इनेलो नेता व पूर्व स्पीकर सतबीर कादियान ने यू-टर्न लेते हुए अपनी-अपनी पार्टी न छोड़ने का फैसला लिया है। मीडिया को हथियार बनाकर अपनी पार्टियों पर दबाव बनाने में असफल होने पर दोनों नेताओं को पार्टी छोड़ने पर अपनी जमीन खिसकती नजर आई। आखिरकार दोनों ने पार्टी एकता का हवाला देकर चुनाव न लड़ने की बात कही।

24 सितंबर को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह को भला-बुरा कहकर पार्टी से रिजाइन करने वाले जगदेव मलिक ने कहा कि सीएम का फोन आया था, इसलिए अब वह पार्टी में ही रहेंगे।

इसके मायने : जगदेव मलिक को पता था कि चुनाव में वह जीत नहीं सकते। 24 सितंबर को समर्थकों की बैठक में बमुश्किल से एक हजार-12 सौ लोग जमा हो पाए थे। ऊपर से सत्ता विरोधी लहर। ऐसे में वोट कटवा ही साबित होते। निश्चित हार को देखते उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला लिया।
बेटे का राजनीतिक भविष्य बचाने कादियान पीछे हटे
इधर इनेलो के वरिष्ठ नेता व पूर्व स्पीकर सतबीर कादियान ने भी चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। कादियान अब पार्टी में ही रहेंगे। मदद किसकी करेंगे यह तो वहीं जानें, लेकिन फिलहाल उन्होंने पार्टी छोड़ने का इरादा त्याग दिया। पूर्व स्पीकर के पुत्र देवेंद्र कादियान ने कहा कि उनकी तो चुनाव लड़ने की इच्छा थी, लेकिन पिता ने मना कर दिया। पिछले 15 दिनों में इनेलो नेता अभय चौटाला ने दो बार कादियान के यहां खाना खाया। इसके बाद ही 25 सितंबर को जींद की रैली में कादियान ने हिस्सा लिया।
इसके मायने : सतबीर कादियान का यह आखिरी चुनाव है। पिछली बार इनेलो से पत्नी ने चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। उनके बेटे देवेंद्र कादियान ने अभी राजनीति शुरू ही की है। एेसे में कादियान नहीं चाहते थे कि कल देवेंद्र कादियान के लिए इनेलो का दरवाजा बंद हो जाए।