नई दिल्ली/पानीपत. प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर के विरोध के बावजूद हुड्डा उन लोगों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे, जिनको वह चाहते थे। लोकसभा चुनाव में हार के बाद संभावना थी कि तंवर को तवज्जो दी जाएगी, लेकिन कांग्रेस ने सीएम पर ही भरोसा जताया...हालांकि कई जगह विरोध भी शुरू हो गया है।
कांग्रेस के टिकट वितरण में आखिर में हाईकमान ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ही चली। पार्टी अध्यक्ष अशोक तंवर के तमाम विरोध के बावजूद हुड्डा उन लोगों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे, जिनको वह चाहते थे। लिस्ट आने के बाद यह साफ हो गया कि पार्टी ने हुड्डा को फ्री हैंड दिया है। हालांकि लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद कहा जा रहा था कि हुड्डा अनुभवी तो तंवर पार्टी का युवा चेहरा होंगे।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक हुड्डा न केवल अपने सभी मौजूदा विधायकों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे, बल्कि पिछली बार जो सीटें कांग्रेस हार गईं थी उन पर भी कांग्रेस ने हुड्डा के पसंदीदा उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी है। दागियों और बागियों को टिकट देने के तंवर खिलाफ थे लेकिन इस मामले में भी हुड्डा की चली।
तंवर ने अपनी नाराजगी जता भी दी। लिस्ट जारी होने से पहले उस पर प्रदेश अध्यक्ष के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। लेकिन प्रत्याशियों के नाम तय करने को नई दिल्ली में बुलाई गई इस बैठक में तंवर महज 5-7 मिनट रुके। अपनी बात रखने के तुरंत बाद वहां से चले गए।इसके बाद पीसी चाको समेत स्क्रीनिंग कमेटी के कई सदस्यों ने तंवर से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने किसी का फोन नहीं उठाया। बताया जाता है कि देर शाम हरियाणा कांग्रेस की सह प्रभारी आशा कुमारी ने तंवर से संपर्क किया व उन्हें पार्टी हितों का हवाला देते हुए अपनी सहमति देने पर राजी किया।
सूत्रों के मुताबिक यहां तंवर को बताया गया कि कमेटी के अधिकांश सदस्य उन लोगों को टिकट देने के पक्षधर हैं, जिन पर तंवर ने अपना विरोध जताया है। यह सुनते ही तंवर ने अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। उन्होंने रबड़ स्टांप की तरह प्रदेश अध्यक्ष बने रहने से इनकार किया और ऐसी स्थिति में प्रदेश अध्यक्ष की बजाए कांग्रेस का साधारण कार्यकर्ता बनकर पार्टी के लिए काम करने की इच्छा जताई।
दोनों खेमों में टकराव की तीन वजहें
1. तंवर नहीं चाहते थे दागियों-बागियों को टिकट मिले। हुड्डा टिकट देने के हिमायती थे।
2. तंवर डबवाली से डॉ. केवी सिंह और रानियां से रणजीत सिंह का विरोध कर रहे थे। हुड्डा ने पक्ष लिया।
3. पिछले कुछ दिनों से हुड्डा खेमे की विरोधी कुमारी सैलजा और तंवर में नजदीकी बढ़ना भी एक वजह रही।
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