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पार्षदों की लड़ाई में फंस गया रेनीवेल प्रोजेक्ट

8 वर्ष पहले
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पानीपत. सदन की बैठक न बुलाने के अडिय़ल रवैये के कारण शहर का अति महत्वपूर्ण रेनीवेल प्रोजेक्ट खिसकने के कगार पर है। केंद्र सरकार की ओर से रेनीवेल प्रोजेक्ट को देख रही सेंट्रल पब्लिक हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने हरियाणा शहरी विकास विभाग को छह आपत्तियां लगाकर भेजी हैं।

इनमें सबसे खास मांग है कि रेनीवेल प्रोजेक्ट को नगर निगम सदन से पास करवाया जाए। इसकी रिपोर्ट एक सप्ताह में भेजी जानी है। केंद्र का स्पष्ट कहना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्रोजेक्ट को छीना जा सकता है। इधर, प्रशासन ने बैठक बुलाने के बजाय नगर निगम के कर्मचारी के हाथ व्यक्तिगत रूप से एजेंडा भेजकर पार्षदों से पास करवाने के लिए कह दिया। मेयर सहित छह पार्षदों ने तो सहमति जता दी, लेकिन 14 पार्षदों ने लिखित में असहमति जताकर सदन की बैठक में एजेंडा पास करने की बात लिख दी।

वार्ड-8 के पार्षद अशोक नारंग, वार्ड-10 के पार्षद अशोक कटारिया और वार्ड-19 के पार्षद लोकेश नांगरू का कोई कमेंट नहीं है, क्योंकि जब निगम कर्मचारी उनके पास पहुंचा उस समय वे पानीपत से बाहर थे। इन तीनों पार्षदों ने दैनिक भास्कर को बताया कि उनकी मांग है कि सदन की बैठक बुलाकर इस रेनीवेल प्रोजेक्ट पर बहस करवाई जाए। वार्ड-22 के पार्षद प्रवेश नैन ने कोई राय नहीं दी है।

जल्दी की चिट्ठी, पर एक्ट कहता है मेयर बुला सकते हैं आपात बैठक

मेयर भूपेंद्र सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस की राजनीति में उलझे नगर निगम के अफसरों ने भले ही रेनीवेल जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पास करवाने के लिए पार्षदों को चिट्ठी भेज उनके हस्ताक्षर हासिल करने के विकल्प चुना हो, मगर हरियाणा म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के एक्ट की धारा 52 (1) के मुताबिक मेयर एक चौथाई पार्षदों (पानीपत में सिर्फ 6) के लिखित अनुरोध को आधार बनाकर कभी भी नगर निगम सदन की आपात बैठक बुला सकते हैं। अगर विषय आवश्यक है तो इसका नोटिस पार्षदों के पास 48 घंटे पहले पहुंचना चाहिए। आम बैठकों के लिए यह समय सीमा पांच दिनों की है।