पानीपत. कैप्टन की 6 विजयी पारियां- 1989 में रेवाड़ी उपचुनाव में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार कैप्टन अजय यादव जीते। लगातार छह बार विधायक बने।
कारण क्या- विपक्ष के लगातार बिखरते वोट ही जीत का आधार बने।
महेंद्र प्रताप 5 बार जीते, बीच में ब्रेक
बड़खल विधायक महेंद्र प्रताप पांच चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि लगातार नहीं। पहले 1982, 87 और 91 में विधायक बने। फिर 2005 में विधायक बने। बड़खल हलका बना तो वहां पहुंचे और 2009 में जीते। बड़खल से मैदान में।
वजह: ईमानदार छवि और जनता से जुड़ाव। इस बार मुकाबला कड़ा है।
प्रो.रामबिलास जीत के बाद हार ही हार
महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र से प्रो. रामबिलास शर्मा लगातार तीन बार हारते आ रहे हैं। उन्हें कांग्रेस के राव दान सिंह ने पराजित किया।
वजह: जातिगत समीकरण से खेल बदल जाता है। इससे पूर्व लगातार चार बार वोटों के विभाजन के कारण जीतते भी रहे।
टोहाना में सिर्फ सिंह परिवार
टोहाना हलके की राजनीति में हुए सभी 11 विधानसभा चुनाव में कृषि मंत्री परमवीर सिंह के परिवार का सदस्य बतौर प्रत्याशी जरूर शामिल रहा। इन चुनावों में पिछले 10 सालों से परमवीर सिंह खुद विधायक हैं तो उनसे पहले उनके पिता हरपाल सिंह पांच बार विधायक रहे। चार बार कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़े तो 1968 में विहपा पार्टी से मैदान में उतरे व जीत गए थे। इस बार भी परमवीर सिंह को कांग्रेस ने मैदान में उतारा है।
24 साल से थानेसर में लड़ रहे अशोक अरोड़ा
थानेसर से इनेलो के मौजूदा विधायक व प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा पिछले 24 सालों से लगातार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। सन् 1990 में अरोड़ा ने लोकदल से ही पहला उपचुनाव लड़ा और जीता। अगले चुनाव में वह कांग्रेस के डॉ.रामप्रकाश से हार गए। अरोड़ा ने यहां से लगातार इनेलो की तरफ से छह बार चुनाव लड़ा। चार बार जीत दर्ज की। दो बार वह चुनाव हारे। सन् 2005 में वह कांग्रेस के रमेश गुप्ता से हारे थे, लेकिन पिछले चुनाव में गुप्ता को हराया। खास बात यह है कि थानेसर सीट पर अरोड़ा ऐसे एकमात्र व्यक्ति हैं, जिन्होंने चार बार जीत दर्ज की।