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पूजन सामग्री बहाते समय बेटी पानी में गिरी, पिता कूदा बचाने पर खुद ही डूब गया

8 वर्ष पहले
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पानीपत. तहसील कैंप इलाके के डॉ. निरंजन के बेटे सुरेंद्र आर्य अब इस दुनिया में नहीं रहे। 50 साल के सुरेंद्र नहर में डूबती 20 साल की अपनी बेटी जयंती को बचाने के लिए पश्चिमी यमुना नहर में कूदे थे। बेटी को तो गोताखोरों ने बचा लिया मगर पिता के सिर में नहर का पत्थर ऐसे लगा कि बेहोशी में ही उनकी जान चली गई। इस दौरान दोनों करीब डेढ़ किलोमीटर तक बहते चले गए।

हादसा असंध पुल के पास पश्चिमी यमुना लिंक नहर पर मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे हुआ। बाप-बेटी संक्रांति पर पूजा का सामान विसर्जित करने गए थे। इस दौरान फिसलन भरी सीढ़ियों से जयंती का पैर फिसल गया। दोनों को नहर में डूबते देख आस पास के लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया।

शोर सुन पास में ही सो रहे गोताखोर नूर मोहम्मद और सुनील ने नहर में बह रहे बेटी और पिता को करीब डेढ़ किलोमीटर तैरकर पीछा किया। पानी से निकालने के बाद सबसे पहले गोताखोरों ने जयंती के पेट से पानी निकाला। जयंती तो होश में आ गई, मगर सुरेंद्र की सांसें चल नहीं रही थी। फिर भी जयंती के कहने पर गोताखोर दोनों को उन्हीं की कार से सामान्य अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने सुरेंद्र आर्य को मृत घोषित कर दिया।

हर माह करते थे विसर्जन

सुरेंद्र की सेक्टर 29 में आर्य मोटर के नाम से मोटर पार्ट्स की फैक्ट्री है। बेटी जयंती फरीदाबाद में अपने दादा डॉ. निरंजन दास के साथ रहकर मैनेजमेंट का कोर्स कर रही है। वहीं छोटा बेटा विनीत यहीं रहकर पॉलिटेक्निक कॉलेज में पढ़ रहा है। जयंती छुट्टियां में घर आई हुई थी। सुरेंद्र हर महीने संक्रांति के दिन पूजा का सामान नहर में विसर्जित करने जाते थे।

अब आंखें देखेंगी दुनिया

सुरेंद्र आर्य के परिवार वालों ने आपसी सहमति से उनकी आंखों को किसी और को रोशनी देने के लिए डोनेट कर दिया। सुरेंद्र आर्य के मित्र डॉ. कौशल ने बताया कि इस दुखद घटना के बाद भी परिवार के सदस्य उनकी यादों को जिंदा रखने के लिए आपसी सहमति से आंखों को दान किया।

सावधान : पानी उतरने से सीढ़ियों पर फिसलन

नहर में अचानक पानी कम होने के कारण लंबे समय से डूबी सीढ़ियों पर इन दिनों काफी फिसलन है। यही लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। गोताखोर सुनील ने बताया कि अभी तक नहर पूरी तरह से भरा था। दो दिन पहले पानी कम हुआ, जिसके कारण अभी तक पानी में डूबी रहने से सीढ़ियों पर फिसलना हो गई है। हर रोज दो तीन लोग सीढ़ियों पर फिसलते दिखते हैं।

कूदे तो पत्थर से टकरा गए

सुरेंद्र आर्य की मौत का कारण पानी में कूदते समय सिर से पत्थर टकराना माना जा रहा है। उनके करीबियों का कहना है कि सुरेंद्र को तैरना आता था। गोताखोरों का भी कहना है कि अगर सुरेंद्र बेहोश न हुए होते तो उन्हें भी बचाया जा सकता था।