रेवाड़ी. 9 महीने पहले तक दोनों मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पालते थे, लेकिन फिर अचानक एटीएम धोखाधड़ी करने का चस्का लग गया। मेहनत कम थी और कमाई ज्यादा इसलिए एक के बाद एक वारदात करते चले गए लेकिन शायद मालूम नहीं था कि एक बार पुलिस के हत्थे चढ़े तो जेल की सलाखों से बाहर आना मुश्किल हो जाएगा। हम यहां एटीएम कार्ड बदलकर धोखाधड़ी करने वाले उस गिरोह की बात कर रहे हैं जिसका एक बदमाश पुलिस के हत्थे भी चढ़ चुका है। गिरोह की वारदातें हर पूछताछ के साथ खुलती जा रही हैं और पुलिस का शिकंजा बदमाशों पर कस रहा है।
इस तरह लगाते थे चूना
हैरानी की बात है कि धोखाधड़ी के दौरान उन्होंने फेवीक्विक को हथियार बनाया। बदमाश फेवीक्विक की बूंदें मशीन के नंबर वाले खटकों पर पहले ही डाल देते थे। एटीएम बूथ में घुसा व्यक्ति कार्ड डालने के बाद जब अपना सिक्रेट कोड दबाता तो उसके कोड वाले खटके फेवीक्विक के कारण नीचे ही चिपक जाते और एटीएम मशीन आगे काम करना बंद कर देती। बूथ में मौजूद रहने के कारण ये धोखेबाज संबंधित व्यक्ति को बताते कि मशीन काम नहीं कर रही है। संबंधित व्यक्ति अपना कार्ड लेकर वापस चला जाता पर चूंकि मशीन का काम प्रोसेस में होता और उसके सिक्रेट कोड दब चुके थे इसलिए बाद में फेवीक्विक को हटाकर ये लोग खाते से रुपए निकाल लेते।
मदद तो एक बहाना था
आरोपियों का प्रयास एटीएम कार्ड बदलने का भी रहता था। एटीएम बूथ में घात लगाए बैठे बदमाश साफ्ट टारगेट यानि आसानी से फंसने वाले व्यक्ति की तलाश में रहते थे। बुजुर्ग या ऐसा कोई व्यक्ति जिसे एटीएम चलाना नहीं आता था उसकी मदद के बहाने से ये लोग एटीएम कार्ड बदल लेते थे। फेवीक्विक के जरिए इन लोगों को कोड नंबर मिल ही जाता था इसलिए ये लोग कार्ड बदलकर कई बार रुपए निकालते थे। एसपी पंकज नैन का कहना है कि आरोपी ने कई वारदातों का खुलासा किया है। वारदात करने का तरीका भी सामने आया है। हमारा प्रयास अब ज्यादा से ज्यादा रिकवरी करने का है। जिन भी जिलों में बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया था वहां की पुलिस को भी सूचित कर दिया है। बदमाश के फरार साथी को भी शीघ्र ही काबू कर लिया जाएगा।
राजस्थान, यूपी में भी वारदातें
एटीएम धोखाधड़ी के मामलों में बीते कुछ दिनों के दौरान तेजी से बढ़ोतरी हुई। दो दिन पहले धारूहेड़ा में हिसार निवासी पवन कुमार के साथ धोखाधड़ी करके दो युवकों ने कार्ड बदल लिया। बदमाशों ने पवन के खाते से 10 हजार की नकदी भी साफ कर ली, लेकिन गनीमत यह रही कि पवन ने बदमाशों में से एक को समय रहते काबू कर लिया। दबोचा गया बदमाश गुर्जर घटाल निवासी विनोद अब पुलिस गिरफ्त में है जबकि उसका साथी फरार है। आरोपी के मुताबिक करीब 9 महीने पहले ही उसने अपने साथी बूढ़ी बावल निवासी रामबीर के साथ मिलकर यह खेल शुरू किया था। उन्होंने रेवाड़ी के अतिरिक्त धारूहेड़ा, राजस्थान के अलवर, बहरोड, पावटा, मेवात के अतिरिक्तहरिद्वार व रुड़की तक में वारदात को अंजाम दिया। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान करीब 40 वारदातों को स्वीकार किया है और इन वारदातों से 5 लाख रुपए हासिल किए।