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5000 की आबादी वाले घोघड़ीपुर गांव ने दिए 5 विधायक, फिर चुटे तैयारियों में

7 वर्ष पहले
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करनाल। इतिहास गवाह है कि हर चुनाव में करनाल जिले के घोघड़ीपुर गांव से कोई न कोई चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने जरूर उतरता है। इस बार भी इस गांव के पांच लोग जिले की चार अलग-अलग विधानसभा सीटों से चुनावी जंग में कूदने की तैयारी कर रहे हैं। यमुना नहर के किनारे बसे इस छोटे से गांव ने प्रदेश को पांच विधायक व एक एमएलसी दिया है। गांव के सुरजीत मान, जानकी देवी, तेजेंद्र पाल मान, सुमिता सिंह व गुलजार मान एमएलए बन चुके हैं। इनमें से तेजेंद्र व सुरजीत मान तो मंत्री भी रहे।
सुमिता सिंह
कांग्रेस टिकट पर करनाल सीट से वर्ष 2005 में जयप्रकाश गुप्ता को 33997 और 2009 में 3731 वोटों से हराया।
गुलजार सिंह मान
1977 में जनता पार्टी की लहर के दौरान राजौंद सीट पर कांग्रेस की प्रसन्नी देवी को 9385 वोटों से मात दी।
जानकी मान
इंद्री से 1991 में बंसीलाल की पार्टी, हविपा की टिकट पर कड़े मुकाबले में भीम सिंह मेहता को 456 वोटों से हराया।
तेजेंद्र मान
पाई से दो बार जीते। 1991 में नरसिंह ढांडा को 10848 और 2005 में रामपाल माजरा को 6502 वोटों से मात दी।
सुशील भार्गव
कांग्रेस टिकट पर 1968 में सेरधा सीट पर 9145 और 1972 में पाई सीट पर 1876 वोटों से जीते। दोनों बार जगजीत पोलू को हराया।
मान बढ़ा रहे सम्मान
अबकी बार ये डटेंगे मैदान में
इस बार विधानसभा चुनाव में घोघड़ीपुर के बृजेंद्र मान, रणवीर मान, असंध व कलायत सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा नेता जयपाल शर्मा व विपिन मान घरौंडा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। सुमिता सिंह करनाल सीट से चुनाव लड़ सकती हैं, जबकि जयपाल मान कई बड़े पदों पर रह चुके हैं। इसी तरह युवा नेता नीटू मान भी अब कांग्रेस पार्टी में हैं।
रायबहादुर एमएलसी चुने गए थे
रायबहादुर बंस गोपाल मान वर्ष 1923 और 1935 में एमएलसी चुने गए थे। वर्ष 1938 में रणधीर सिंह मान को-ऑपरेटिव बैंक के एमडी बने। वर्ष 1952 में वे घरौंडा-राजौंद विधानसभा सीटों से आजाद चुनाव लड़े। पूर्व विधायक गुलजार सिंह मान कहते हैं कि यहां शुरू से राजनीति का बोलबाला है।
आगे की स्लाइड में देखिे यहां से रहे विधायकों की तस्वीरें...