सिरसा. टिकट वितरण पर आमने-सामने होने की बात को भले की कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.अशोक तंवर और मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा नकारते हों लेकिन पर्दे के पीछे छनकर आ रही खबरें बताती हैं कि सबकुछ ठीक नहीं है। दोनों के संबंधों को लग रहे करंट की तार सिरसा से ही जुड़ी बताते हैं।
योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष रणजीत सिंह और सीएम के पूर्व ओएसडी डाॅ. केवी सिंह पर तंवर अप्रत्यक्ष रूप से भितरघात के आरोप लगाते आए हैं। ये दोनों ही सीएम के खास हैं। कालांवाली को सबडिवीजन का दर्जा देने की धन्यवाद रैली में दोनों ही नेता मंच पर सीएम के साथ थे। तब तंवर ने बिना नाम लिए जनता के सामने ही मंच हाइजैक करने के आरोप लगाकर कटाक्ष किया था। अब दोनों ही टिकट के दावेदार हैं। सीएम इनके हिमायती हैं तो तंवर नाराज हैं।
राहुल दरबार में पहुंचा मामला
रविवार रात को सीएम खेमा दोनों टिकटों पर अपनी जीत का दावा कर रहा था। सोमवार सुबह तक मामला फिर से पेचीदा हो गया। अशोक तंवर दोनों टिकटों का मामला
राहुल गांधी के दरबार में लेकर चले गए।
वजह-1 दो टिकटों पर रार
सीएम रानियां से रणजीत सिंह और डबवाली से डाॅ. केवी सिंह को टिकट दिलाना चाहते हैं। दोनों ही जाट समुदाय से हैं। मगर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष इन दोनों सीटों पर सिख बहुल क्षेत्र होने के कारण सिख उम्मीदवारों को टिकट दिलवाना चाहते हैं, ताकि सिखों को टिकट देकर वे प्रदेश के 18 लाख सिखोें में अपनी पकड़ बना सकें।
वजह-2 सिखों पर क्रेडिट
लोकसभा चुनावों में सिखों की अलग गुरुद्वारा कमेटी की मांग कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने राहुल गांधी तक पहुंचवाई थी। मगर 6 अगस्त को सीएम ने कमेटी की घोषणा करके खुद क्रेडिट ले लिया। सीएम के इस दांव से तंवर बैकफुट पर आ गए।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने कभी मेरे लिए भितरघात की बात नहीं कही है। हो सकता है नाखुश लोग कांग्रेस का नुकसान करने के लिए प्रचारित कर रहे हों।'
-डॉ. केवी सिंह
सीएम और प्रदेशाध्यक्ष में इतना विरोधाभास क्यों है, इस पर मैं कुछ नहीं कह सकता। सीएम और प्रदेशाध्यक्ष दोनों ही हमारे नेता है। कभी भितरघात का आरोप नहीं लगा।'
-रणजीत सिंह