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चुनाव आए तो खादर के 22 गांवों के 35 हजार लोगों के लिए सच में अच्छे दिन आ गए

7 वर्ष पहले
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पलवल. खादर के 20-22 गांवों को पलवल को जोड़ने वाली सड़क लगभग बनने को है। जो रास्ता ढाई से तीन घंटे का "नरक यात्रा' जैसा था, उस पर कुछ दिन बाद गाड़ियां सरपट दौड़ेंगी। फिर किसी बीमार को बड़े अस्पताल तक पहुंचाने में देरी नहीं होगी। पलवल से यमुना को पार कर करीब 20 से 25 किलोमीटर के रास्ते पर छह महीने से जमकर धूल उड़ रही है। 30 करोड़ से अधिक की लागत से पलवल से खादर को जोड़ने वाले करीब 24 किलोमीटर के रास्ते को पांच फुट की मिट्टी की भरत से ऊंचा उठाकर उस पर गिट्टी व मुरम को कूटा जा रहा है। इसके बाद इस पर डामर रोड बनेगी। यही वजह है कि ये धूल यहां से हर रोज गुजरने वाले हजारों लोगों को नहीं अखर रही।
वे जानते हैं कि यह उनकी जीवन रेखा बनने जा रही है। ढाई से तीन घंटे का रास्ता बमुश्किल आधे घंटे का रह जाना है। चुनाव न आते तो शायद ही रोड न बन पाती। ग्रामीणों से 2009 के लोकसभा चुनाव में सांसद अवतार सिंह भड़ाना ने इसे बनाने का वायदा किया था।
इलाज के अभाव में हुईं मौतें
इस रोड को पार कर गांव सोलड़ा जब भास्कर की चुनाव टीम पहुंची तो वहां मेंबर पंचायत राजकुमार मिले। इस रोड से क्या बदलेगा? इस सवाल पर उनकी आंखें भर आईं। बोले-खादर के कई गांवों के कई बच्चों और बुजुर्गों ने इसलिए दम तोड़ दिया क्योंिक बारिश में पलवल के बड़े अस्पताल तक मरीजों को ले जाना संभव ही नहीं था। उनका खुद के 4 साल के इकलौते पोते को निमोनिया हो गया था, रास्ते में पानी भरा था। कैसे ले जाते? उसने हाथों में दम तोड़ दिया। एक अन्य केस में परिवार में 14 साल का बेटा भी गंभीर रूप से बीमार था। सड़क ऐसी नहीं थी कि उसे पलवल ले जाते, उचित इलाज के अभाव में उसकी भी जान गई। खादर के हर गांव में ऐसे सैकड़ों मामले हुए। रुग्गण व रघुराज बघेल कहते हैं, कई बार पानी गले तक रहता था। कई तो डूब जाते थे। 16 गांवों की स्थिति ज्यादा खराब थी।
बाढ़ में तो घर भी डूब जाते थे
यमुना में बाढ़ आती तो घर डूब जाते थे। रास्तों का पता नहीं चलता था। अब बरसात में भी पलवल पहुुंचा जा सकेगा। राजपूत समाज के राजेश सिंह के अनुसार बच्चों को स्कूल काॅलेज में जाने में और व्यापारियों को भी लाभ होगा।
खादर को पलवल से जोड़ने वाली सड़क पर काम जोरशोर से हो रहा है।