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आज की फिक्र: महागठबंधन में अफसाना ज्यादा, हजकां-हजपा जता रही संभावना

7 वर्ष पहले
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पानीपत। हजकां-हजपा-हलोपा-बसपा को एक मंच पर लाकर महागठबंधन बनाने की चर्चा चल रही है। ऐसा होने के बाद क्या तस्वीर बनेगी इसका आंकलन तो धुंधला है, लेकिन 2009 के चुनाव नतीजे के संदर्भ में इन चारों का जोड़ दें तो इनके खाते में 9 सीटें बनती हैं। इन चारों का वोट बैंक जोड़ें तो भाजपा से ज्यादा बनता है। 2009 में भाजपा को 9.05 प्रतिशत वोट मिली थी। बसपा नेताओं के ताजा बयान कह रहे हैं कि इस महागठबंधन में हकीकत कम अफसाना ज्यादा है। हलोपा ने साफ कह दिया कि ऐसी कोई संभावना नहीं।
> हरियाणा जनचेतना पार्टी (हजपा) विनोद शर्मा अम्बाला सिटी से कांग्रेस के टिकट पर जीते।
> हलोपा प्रमुख गोपाल कांडा निर्दलीय के तौर पर सिरसा सीट से जीते।
महागठबंधन कुछ भी नहीं है। यह हजकां अफवाह उड़ा रही है क्योंकि उसके नेता बसपा में आ रहे हैं। 90 सीटों पर बसपा अकेले चुनाव लड़ेगी। जींद रैली में पार्टी के सीएम प्रत्याशी अरविंद शर्मा ने महागठबंधन की कोई पेशकश नहीं की।
-नरेश सारन, प्रदेश अध्यक्ष, बसपा
बसपा चाहे तो गठबंधन दलित-ब्राह्मण-पिछड़े वर्गों को 20-20 प्रतिशत सीटें देने को तैयार है। समान विचारधारा वाले दलों को साथ लाने का प्रयास चल रहा है।
-कुलदीप बिश्नोई हजकां प्रमुख
कौन कहां असरदार
> हजकां : हिसार जिले की कुछ सीटों पर असरदार। करनाल-भिवानी-पंचकूला-पानीपत जिलों में रिवाइव करने का प्रयास।
> बसपा: जगाधरी, साढौरा, मुलाना, नारायणगढ़ सीटों पर असर है। अरविंद शर्मा के कारण करनाल जिले में उपस्थिति।
> हजपा : विनोद शर्मा अम्बाला सिटी सीट तक सीमित। पंचकूला-करनाल-कुरुक्षेत्र में पांव पसारने की कोशिश।
> हलोपा : सिरसा सीट पर प्रभाव। फतेहाबाद, रतिया, कालांवाली में प्रयासरत।
इसमें दिक्कतें कहां

कुछ साल पहले यूपी में जिस सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर मायावती सत्ता में आईं, वही फार्मूला पहली बार हरियाणा में अपनाया जा रहा है। पार्टी इस बार ब्राह्मण को मुख्यमंत्री प्रत्याशी बनाकर अपना दम परखना चाहती है।

बसपा का पहले भी हजकां से समझौता हुआ लेकिन ज्यादा दिन नहीं चला। अरविंद शर्मा ब्राह्मण नेता के रूप में मैदान में हैं जबकि ऐसी ही भूमिका हजपा प्रमुख विनोद शर्मा चाहते हैं। एक म्यान में दो तलवारें कैसे रहेंगी। बसपा 17 प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। इनमें से कुछ सीटों पर हजकां का दावा है।