पानीपत. दुष्यंत जैसे ही चुनाव लड़ने की उम्र में पहुंचे, इनेलो ने उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ाकर संसद में भेजा। अब वह उन्हें विधानसभा में क्यों भेजना चाहती है? जवाब में गहरे राजनीतिक गणित और भविष्य की संभावनाओं का खाका ही उभरता है। उसने दुष्यंत को उम्मीदवार बनाकर एक साथ पांच दांव खेले हैं।
1. सॉफ्ट फेस यानी बिना मरोड़
इनेलो की छवि सौम्य दल के रूप में नहीं जानी जाती। विरोधी इसे लेकर उस पर निशाना साधते रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष
अमित शाह ने जींद रैली में इसे लेकर उस पर प्रहार किया था, वहीं कांग्रेस ने इनेलो को लक्ष्य कर शराफत और विकास का नारा दिया। दुष्यंत इस आरोप की अच्छी काट हैं। उन्हें स्वभाव से अपेक्षाकृत शांत और सौम्य माना जाता है।
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