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केंद्र, पंजाब व हरियाणा सरकार को अनाज की खरीद के निर्देश

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. एग्रीकल्चर प्राइस पॉलिसी का लाभ किसानों को न मिलने पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भाकियू प्रधान गुरनाम सिंह की याचिका पर केंद्र, पंजाब व हरियाणा सरकार सहित सभी सरकारी खरीद एजेंसियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज खरीद के निर्देश दिए हैं। कार्यवाहक चीफ जस्टिस आशुतोष मोहंता की खंडपीठ ने कहा कि प्राइवेट एजेंसी यदि अनाज नहीं खरीद रही हैं तो सरकारी एजेंसी अनाज खरीदें। मामले पर एक अक्टूबर के लिए अगली सुनवाई तय की गई है।

भारतीय किसान यूनियन प्रधान की तरफ से अर्जी दायर कर कहा गया कि इस्माईलाबाद मंडी में 4230, थानेसर मंडी में 7675, पिपली में 4305, शाहबाद में 4990 क्विंटल अनाज मंडी में 15 सितंबर तक पहुंच चुका है। साथ ही लगातार अनाज की आवक मंडी में जारी है। ऐसे में भी अभी तक अनाज की न्यूनतम समर्थन मूल्य की खरीद के लिए एजेंसियों की ओर से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। हाईकोर्ट ने अनाज की मंडियों में लगातार आवक को देखते हुए एजेंसियों और सरकार को निर्देश जारी करते हुए कहा कि वे इस अनाज की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करें।
भाकियू प्रधान गुरनाम सिंह ने दायर की थी याचिका
भाकियू के प्रधान गुरनाम सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि केंद्र सरकार की एग्रीकल्चर प्राइस पॉलिसी की पालना न होने के चलते किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहें हैं। हर वर्ष मृतकों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हो रही है। एजेंसियां किसानों की अनदेखी कर रहीं है जिसके चलते किसानों को प्राईवेट पार्टी को सस्ते दामों पर अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सुरजमुखी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3700 रुपए था परंतु खरीद एजेंसियों की देरी के चलते किसानों को इसे 2650 से 3000 के मूल्य पर बेचना पड़ा। वहीं मक्के की फसल पंजाब का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1310 रुपए था परंतु खरीद एजेंसियों के अभाव में किसानों को इस फसल के केवल 650 से 1200 रुपए ही मिले। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि केंद्र, हरियाणा, पंजाब सरकार तथा खरीद एजेंसियों को निर्देश जारी किए जाएं कि एग्रीकल्चर प्राइज पॉलिसी को राज्यों में सही दिशा में लागू किया जाए। फसल की आवक के साथ ही एजेंसियां खरीद के लिए मार्केट पहुंचे। मंडियों से रिकार्ड मंगवाया जाए कि मंडियों में कितनी आवक हुई और कितना अनाज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिका। साथ ही उन्होंने कोर्ट से अपील की कि केंद्र, हरियाणा व पंजाब सरकार को निर्देश दिए जाएं कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य न मिलने से हुए घाटे की भरपाई की जाए।