(सेक्टर-6 वार्ड 24 में सिद्धार्थ नगर में अंडर पास तो है, लेकिन रेलवे ट्रैक से गुजरती युवती।)
पानीपत। लघु सचिवालय और जिला अदालत के पीछे कोई कॉलोनी नहीं, लेकिन सुबह और दोपहर को पीठ पर बस्ता टांगे सैकड़ों स्कूली बच्चे आते-जाते दिख जाएंगे। ये बच्चे नगर निगम की उन कॉलोनियों के हैं, जिनसे नगर निगम वह सभी टैक्स वसूलता है, जो एक पॉश कॉलोनी वालों से। बच्चे तो स्कूल में होते हैं, लेकिन घर में परिजनों की सांसें अटकी रहती हैं। दोपहर को आंखें टकटकी लगाए दरवाजे की ओर देखती रहती है, क्योंकि उनके बच्चे व्यस्त दिल्ली-अम्बाला रेलवे लाइन पार कर घर पहुंचते हैं।
इसी रेलवे लाइन के नीचे तीन अंडरपास बनाने की मांग पर मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट मांगी है। रेलवे लाइन पार डेढ़ दर्जन से अधिक कॉलोनियों के बच्चे रोज जान हथेली पर लेकर यहां से गुजरते हैं, जिस पर पल में ओझल होने वाली शताब्दी भी चलती है। हरि नगर, सैनी कॉलोनी, सिद्धार्थ नगर और काबड़ी कच्ची फाटक अनेक परिवारों को गहरा जख्म दे चुका है। इन कॉलोनियों में गरीब तबके के लोग रहते हैं। शायद इसीलिए इनकी नहीं सुनी जाती।
सैनी कॉलोनी के रहने वाले ईश्वर मराठा ने बताया कि उन लोगों के साथ पहले से ही भेदभाव किया जा रहा है। ड्रेन पक्का करने की बारी आई, उस वक्त भी ग्रामीण एरिया बताकर रेलवे लाइन पार के हिस्से को छोड़ दिया गया। हालांकि यह भी नगर निगम का हिस्सा है। अब रेलवे लाइन के नीचे अंडरपास बनाने की मांग है। वहीं, सोनू ने एसएमएस कर बताया कि अंडरपास बनने से यहां की सभी मुसीबतें हल हो जाएंगी।
साथ ही, असंध रोड और लालबत्ती पर लगने वाला जाम भी खत्म हो जाएगा। यहां के वाहन असंध रोड से नहीं जाएंगे और लालबत्ती चौक पर वाहनों का दबाव कम हो जाएगा। कई अन्य लोगों ने भी एसएमएस व फोन कर अंडरपास को शहर की जरूरत बताया।
पानीपत. जान को जोखिम में डालकर वार्ड-24 के सैनी काॅलोनी में रेलवे ट्रैक से जाते विद्यार्थी।
वार्ड-24 की हरि नगर काॅलोनी में अंडरपास न हाने के कारण बाइक लेकर रेलवे ट्रैक पार करता युवक।
रेलवे ट्रैक से जाते विद्यार्थी। इस तस्वीर में आप देख सकते है सामने से ट्रेन आ रही है।
सेक्टर-6 वार्ड 24 में सिद्धार्थ नगर में अंडरपास तो बना है, लेकिन उसके नीचे से नाला बह रहा है, उसमें से गुजरते लोग।
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