पानीपत। तीन युद्धों के लिए प्रसिद्ध पानीपत अब अपनी गाथा खुद ही सुनाएगा, उन सैलानियों को जो पानीपत को जानने यहां आएंगे। पानीपत की तीसरी लड़ाई की याद के रूप में सनौली रोड पर विकसित किए गए काला अंब पार्क में ‘लाइव, लाइट एंड साउंड’ सिस्टम के तहत हर शाम पानीपत की खूबियां बताई जाएंगी। जिला प्रशासन यहां पानीपत कल्चर हैरिटेज सोसायटी बनाने जा रहा है।
अक्षरधाम और कुरुक्षेत्र के म्यूजियम की तरह पानीपत के काला अंब में भी लाइट और साउंड सिस्टम लगाए जाएंगे।
हाली, अब्बास भी यहां के
अब तक पानीपत को लोग तीन युद्धों से ही पहचानते हैं। कोई ये नहीं कहता कि यहां पर अल्ताफ हुसैन हाली जैसे शायर थे।
अमिताभ बच्चन को फिल्मों में लाने वाले ख्वाजा अहमद अब्बास यहीं के थे। काला अंब में इनके बारे में भी बताया जाएगा।
पानीपत को मिलेगी अपनी जुबान
काला अंब में जिस स्मारक के नजदीक पर्यटक पहुंचेंगे, स्मारक खुद बोलकर अपना इतिहास सुनाएगा। इसमें स्मारक का महत्व, स्मारक और उससे जुड़े शासक के शासन आदि के बारे में जानकारी समाहित होगी। डीसी समीरपाल सरो ने कहा कि एक मेमोरियल बनाया जाएगा, जिसमें युद्ध संबंधी सभी हथियार इसी मेमोरियल में फाइबर कवर में रखे जाएंगे।
पुरातत्व विभाग से करेंगे बैठक
डीसी समीरपाल सरो ने कहा कि इस प्लानिंग के साथ जल्द ही पुरातत्व विभाग के साथ वह बैठक करेंगे, ताकि इसको मूर्त रूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसा संभव है और हम कर सकते हैं। क्यों न एक ऐसी जगह हो, जहां फुर्सत के पल बिताने जाएं। आकर कुछ देर के लिए चैन मिले।
उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। संभव है कि लाइट और साउंड में यहां के टेक्सटाइल उद्योग की खूबियों को भी जोड़ दिया जाए, जिससे पानीपत आने वाले पर्यटक इस ओर आकर्षित हो सकें। डीसी ने कहा कि इसके लिए हर जगह से मदद मांगेंगे। उद्योग और स्कूलों से भी। स्कूली बच्चों के घूमने के लिए क्यों न पानीपत में ही एक जगह हो, जहां उन्हें ज्ञान भी मिल सके।
झील में पानी, रेस्टोरेंट भी शुरू करेंगे
डीसी समीरपाल सरो ने बताया कि इसे नया लुक देंगे। इसमें भारतीय पर्यटन विकास निगम और पुरातत्व विभाग की मदद ली जाएगी। फिलहाल यहां पर जो झील है, वह सूख चुकी है। रेस्टोरेंट बंद हो चुका है। इसे फिर से शुरू किया जाएगा। जल्द शुरू होने वाले प्रोजेक्ट अप्रैल से सिरे चढ़ सकते हैं।
छाएगी रौनक, मिलेगा रोजगार
पानीपत कल्चर हैरिटेज सोसायटी के गठन के बाद जब काला अंब विकसित होगा तो ऊझा, उग्राखेड़ी और आसपास रौनक छा जाएगी। लोगों को रोजगार भी मिलेगा। वर्तमान काला अंब के पास जमीन की भी कमी नहीं है। सात एकड़ जगह में झील भी बनाई जा सकती है।
फिलहाल क्या है स्थिति
जीटी रोड पर फ्लाईओवर बनने से पूर्व सड़क किनारे लगाई गई योद्धाओं की कुछ मूर्तियां लोधी पार्क तो कुछ संग्रहालय मे रखवा दी गईं, जो बदहाल हैं। युद्ध के हथियारों में जंग लग गई है। रखरखाव के अभाव में पानीपत अपनी धरोहर खोता जा रहा है। उम्मीद है कि अब पानीपत को पर्यटन केंद्र के रूप में पहचान मिलेगी।
> पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा
> बनाई जाएगी कल्चर हेरिटेज सोसायटी
> सभी धरोहरों को सहेज कर एक ही जगह रखेंगे
> कुरुक्षेत्र म्यूजियम की तरह लाइट, साउंड सिस्टम लगाएंगे।