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डाउनलोड करेंपानीपत। आज ज्यादातर लोग राजनीति में आकर अपना स्टाइल बदल देते हैं, राजनीति में आकर मफलरमैन बनने की बातें केजरीवाल के लिए भी होती रही हैं। लेकिन सिवानी मंडी में रहने वाले केजरीवाल के चाचा गिरधारीलाल का कहना है कि राजनीति के कारण केजरीवाल मफलरमैन नहीं बने, बल्कि उन्हें बचपन से ही कुछ अधिक ठंड लगती थी, इसके कारण से मफलर पहनते हैं। मीडिया ने उनके इस मफलर को स्टाइल से जोड़कर उन्हें मफलरमैन बना दिया।
चाचा गिरधारीलाल का कहना है कि केजरीवाल बचपन से ही धीर-गंभीर थे। व्यापारी परिवार से होने के बाद भी उन्होंने साधारण जीवन गुजारा है। वे राजनीति में आकर आम आदमी नहीं बने, बल्कि आईआरएस जैसे पद पर पहुंचकर भी साधारण ही रहते थे। शुरुआत से ही पढ़ाई में ध्यान देते थे और घर से दूर 25 किलोमीटर दूर पढ़ने के लिए जाते थे।
दोबारा दिल्ली जीतने पर गिरधारीलाल का कहना है कि पहली बार चुनाव लड़ने से पहले नौकरी छोड़ी तो गांव में आया था, गांव आकर उसने कहा था कि चाचाजी मैंने नौकरी छोड़ दी। मैंने कहा कि कारखाना लगवा दूं। बोला नहीं अब कुछ अलग करुंगा। इस बार दिल्ली में दोबारा चुनाव जीत कर उसने वाकई में अलग करके दिखा दिया है।
व्यापारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं केजरीवाल
सिवानी मंडी से 30 किलोमीटर दूर खेड़ा गांव में 1947 से पहले अरविंद केजरीवाल के दादा मंगलचंद आकर बसे थे। उस समय मंगलचंद ने वहां पर दाल मिल लगाई थी। उनके पांच बेटे थे। अरविंद के पिता गोविंदराम, मुरारीलाल, राधेश्याम, गिरधारीलाल और श्यामलाल। गोविंदराम ने जिंदल उद्योग में नौकरी की और फिर हरियाणा से बाहर कईं शहरों में काम किया। उनके दादा और चाचा सिवानी मंडी में आढ़त और सरसों तेल का काम करते हैं।
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