पानीपत. आपसी मेलजोल व विवाद निपटाने के लिए बनीं खापों पर भी राजनीति का असर दिखाई देने लगा है। यही वजह है कि हाल ही में कुछ खापों के प्रतिनिधियों ने खाप से जुड़े लोगों को साफ कह दिया था कि चुनाव लड़ना है तो अलग हो जाइये। वहीं, कुछ खाप ऐसी हैं, जो पंचायती उम्मीदवार खड़ा करती हैं। यह तय है कि जाट बहुल में जाट नेताओं का ही वर्चस्व रहता है। इसी कारण खापों का महत्व भी बढ़ा है। खापों ने जहां-जहां अपने वजूद का दावा जताया है, वहां पर बिखराव के कारण रिजल्ट कुछ और भी रहे हैं। किस खाप का कहां असर, कौन जीते, क्या रहे समीकरण इसी पर रिपोर्ट।
पॉलिटिक्स गेम: इनेलो का सर्वखाप की प्रधान संतोष पर दांव
सर्वखाप पंचायत की महिला प्रधान संतोष देवी को इनेलो ने हलका बेरी से पार्टी का टिकट दिया है। कंडेला खाप प्रधान टेकराम कंडेला भी पहले इनेलो की राजनीति करते रहे। वर्ष 1991 में उन्होंने इनेलो के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए थे। टिकट न मिलने से खफा होकर वह इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैंं। समैण बिठमड़ा खाप से जुड़े और सर्वजाट खाप पंचायत के प्रवक्ता रहे सूबेसिंह समैण ने भी टोहाना से इनेलो का टिकट मांगा था। पार्टी ने टिकट नहीं दिया, इसलिए नाराज चल रहे हैं।
क्या आप जानते हैं- 12 से ज्यादा गांवों को मिलाकर बनाते हैं खाप
प्राचीन काल से ही गांवों की संख्या के आधार पर सबसे छोटी इकाई तपा बनाई गई है। कई तपे मिलाकर बारहा और कई गांवों को मिलाकर खाप बनाई गई थी। खाप सामाजिक तौर पर आपसी सहमति से बनाई हुई संस्था है। राजा हर्षवर्धन के समय 643 ई. में भी पंचायतों और खाप का जिक्र है। गौत्र आधार पर श्योराण खाप, सांगवान खाप, दहिया खाप, हुड्डा खाप, दलाल खाप, कादियान खाप, बूरा खाप, ढुल खाप, भनवाला खाप, लाठर खाप, काजल खाप आदि हैं। सामाजिक तौर पर सतरोल खाप, जाटू खाप चौरासी, सात बांस खाप, नंदगढ़ चुडाली खाप, बरहा कलां बारहां, हाट बारहा, झारसा 360 आदि हैं।
महम चौबीसी का पॉलिटिकल रुख
पूरे हरियाणा में केवल महम चौबीसी खाप ने ही अपने उम्मीदवार उतारे हैं। महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर खाप ने इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से फैसला लेकर अपने पंचायती उम्मीदवार को चुनाव लड़वाया और उन्हें जीत दिलवाई। खाप ने हरस्वरूप बूृरा को पंचायती उम्मीदवार बनाकर जिताया। उमेद सिंह को भी महम चौबीसी ने पंचायती उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़वाकर जीत दिलवाई थी। सबसे पहले प्रो.महा सिंह को समर्थन दिया था, जो जीतने के बाद प्रदेश के शिक्षा मंत्री भी बने थे। अब महम चौबीसी खाप में दो विचारधाराएं बन गई हैं। एक का नेतृत्व राजू ढाका करते हैं जबकि दूसरे के तुलसी ग्रेवाल। इसी वजह से खाप का राजनीतिक प्रभुत्व थोड़ा कम हो गया है।
* वोटों की संख्या खाप और अन्य सभी मतदाताओं को मिलाकर है।
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