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एक पेड़ जिसको काटने से निकलता था खून, मराठों के रक्त से हुई थी सिचाई!

7 वर्ष पहले
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पानीपत. पानीपत की जमीन पर तीन युद्ध लड़े गए थे। ये सन् 1526, सन् 1556 और सन् 1761 में लड़े गए। पानीपत का तीसरा युद्ध 14 जनवरी, 1761 को मराठों और मुगलों के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में मराठों की तरफ से सदाशिवराव भाऊ और मुगलों की ओर से अहमदशाह अब्दाली ने नेतृत्व किया था।
पानीपत की लड़ाइयों के बारे में सभी जानते हैं, लेकिन क्या इससे जुड़ी एक खास बात के बारे में आपने सुना है? क्या आपने सुना है उस पेड़ के बारे में जिसे काटने पर उसमें से खून निकलता है? नहीं सुना? आइए, आपको बताते हैं इसके बारे में।
कहा जाता है कि भीषण युद्ध के कारण हुए रक्तपात से इस जगह की मिट्टी लाल हो गई थी, जिसका असर इस आम के पेड़ पर भी पड़ा। इस युद्ध में तकरीबन 70,000 मराठा सैनिकों की मौत हो गई थी।
आगे की स्लाइड्स में जानें इस पेड़ की अद्भुत कहानी-