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अंडर-14 हॉकी टीम की सदस्य घर लौटी, मां की इच्छा बिटिया बने गोल्डन गर्ल

9 वर्ष पहले
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पानीपत. 'मैं हॉकी खिलाड़ी नहीं बन सकी, लेकिन मेरे मन में हमेशा यह इच्छा हिलोरे लेती रही कि मेरी बेटी इंटरनेशनल हॉकी खिलाड़ी बने। मेरा सपना मेरी बिटिया जरूर साकार करेगी। मैं अपनी बेटी आकांक्षा में पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान ममता खरब को देखती हूं।

चाहती हूं कि मेरी बेटी भी उस जैसी गोल्डन गर्ल बने।' यह कहना है स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से दिल्ली में हरियाणा की अंडर-14 टीम में हॉकी टीम में पानीपत से प्रतिनिधित्व करने वाली आकांक्षा शुक्ला की मां सीमा का।

हरियाणा की टीम टूर्नामेंट में फाइनल तक पहुंची। टीम ने राई को 11-0 से, गुजरात को 9-0 से, महाराष्ट्र को 10-0 से हराया, लेकिन दिल्ली की टीम से 2-0 से हार गई।


पानीपत में सुविधाएं नहीं तो क्या, बेटी में जूनून तो है
आकांक्षा जब मंगलवार को वापस अपने घर लौटी तो रेलवे स्टेशन पर मां और कोच संजीव त्यागी ने बिटिया को उसकी सफलता पर खुशी में बांहों में उठा लिया।

वधावा राम कॉलोनी में सिलाई का काम करने वाली सीमा शुक्ला कहती हैं कि 'यह सही है कि हॉकी के लिए पानीपत जैसे शहर में न तो एस्ट्रोटर्फ यानी सिंथेटिक घास वाला मैदान है और न ही बड़े लेवल की ट्रेनिंग।

कोच संजीव त्यागी बहुत अच्छी ट्रेनिंग देते हैं। आकांक्षा हमेशा हॉकी के बारे में सोचती है। शाहरुख खान की 'चक दे इंडियाÓ फिल्म कई बार देखी है।


मां का सपना करूंगी साकार : आकांक्षा
आर्य गल्र्स पब्लिक स्कूल में छठी कक्षा की छात्रा व हॉकी खिलाड़ी आकांक्षा ने कहा कि 'मैं अपनी मां का सपना साकार करने का प्रयास करूंगी। कारपेट फैक्टरी में काम करने वाले मेरे पापा अरविंद शुक्ला भी मुझे हॉकी की बड़ी खिलाड़ी बनते हुए देखना चाहते हैंं।Ó

कोच संजीव त्यागी ने कहा कि आकांक्षा बैकफुट की अच्छी प्लेयर है। इस टूर्नामेंट में पानीपत से कोई खिलाड़ी पहली बार शामिल किया गया।


न प्रिंसिपल आए न प्रबंधक
रेलवे स्टेशन पर आकांक्षा का स्वागत किया गया। लेकिन मौके पर आर्य गल्र्स पब्लिक स्कूल का न कोई प्रबंधक आया और न ही प्रिंसिपल। हालांकि इससे पहले सीबीएसई नेशनल टूर्नामेंट में जब टीम जीतकर आई थी, स्कूल प्रबंधन ने खिलाडिय़ों का भव्य स्वागत किया था।