पानीपत. शारदीय नवरात्र 25 सितंबर, गुरुवार से प्रारंभ हो रहे हैं। इस वर्ष नवरात्रों में अद्भुत योग निर्मित हो रहे हैं। गुरुवार का कारक ग्रह गुरु इस समय उच्च राशि कर्क में स्थित है। साथ ही, शनि भी तुला राशि में उच्च का बना हुआ है।
इससे पहले उच्च गुरु के योग में नवरात्र 2002 में थे, लेकिन उस समय शनि उच्च का नहीं था। श्री सनातन धर्म शिव मंदिर सेक्टर-12 के पुजारी पंडित रामप्रकाश पाठक ने बताया कि उच्च गुरु के साथ नवरात्रि का योग 12 वर्ष बाद बना है। नवरात्र गुरुवार से शुरू होने पर गुरु-शनि के उच्च होने से यह कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रहेगा शनि एवं गुरु, दोनों ग्रह मैत्री भाव रखते हैं। दोनों ग्रह निर्माण करते है। गुरु ज्ञान का निर्माण करता है और शनि दंड का कारक ग्रह है। देश के लिए नवरात्र का यह योग फायदेमंद रहेगा। आने वाले वर्षों में यह योग फिर 2073 में निर्मित होगा।
पंचांगों में है तिथियों का भेद
कई पंचागों के अनुसार नवरात्र के दिनों में तिथि क्षय होगी, इससे नवरात्र आठ दिनों तक ही मनेंगे। कुछ पंचांग में अष्टमी एवं नवमी को एक साथ माना गया हैं और कुछ पंचांग में नवमी-दशमी तिथि को एक साथ माना गया है। जिस पंचांग में नवमी-दशमी तिथि एक साथ मानी गई है, उनके अनुसार नवरात्रि नौ दिनों की रहेगी।
राशियों पर यह रहेगा प्रभाव
नवरात्रों में सभी राशियों पर नवरात्रों का अलग-अलग प्रभाव रहेगा। न्यू रमेश नगर, तहसील कैंप स्थित श्री बलराम मंदिर के पंडित रामप्रकाश पाराशर ने बताया कि कई राशियों के लिए यह नवरात्र अच्छे फलदायी रहेंगे।
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