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विधानसभा चुनाव: आदमपुर में 18 साल से विकास का सूखा

7 वर्ष पहले
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पानीपत. पूर्व मुख्यमंत्री स्व. चौधरी भजनलाल का अपना घर (हलका) आदमपुर अपनों में फाइट की हालत से जूझ रहा है। भजनलाल दूसरे दलों को तोड़ने में माहिर रहे तो अब आदमपुर में उनके अपने बेटे कुलदीप के साथ रहे दोस्त कुलबीर बेनीवाल इनेलो के टिकट पर सामने आ गए हैं। हलके के मुद्दों और राजनीति पर गिरिराज अग्रवाल की रिपोर्ट....
राजनीति में तोड़फोड़ करने के माहिर रहे पूर्व मुख्यमंत्री स्व. चौधरी भजनलाल का अपना घर (हलका) आदमपुर भी इस बार कुछ ऐसी ही त्रासदी झेल रहा है। मंडी में बिलकुल पड़ोसी रहे और हर सुख-दुख में साथ देने वाले कुलबीर बेनीवाल ही आज कुलदीप बिश्नोई के सामने चुनाव मैदान में आ डटे हैं। खटास यहां तक हो गई है कि कुलबीर सिंह दावा करते हैं कि इस चुनाव के बाद वह भजनलाल परिवार का स्थायी निवास दिल्ली में ही करवा देंगे। हालांकि भजनलाल के खासमखास व्यक्ति होने के सवाल पर कुलबीर बेनीवाल कहते हैं कि भजनलाल परिवार उनका अच्छा पड़ोसी जरूर रहा है, लेकिन न तो उनसे कोई फायदा उठाया और न ही उन्होंने कभी उसके लिए कुछ किया।

हलके के लोगों की कभी सरकार और प्रशासन में तूती बोलती थी, लेकिन अब यह गुजरे जमाने की बात हो गई है। इस हलके के लोग पिछले 18 साल से फिर वैसे ही हालात और माहौल का इंतजार कर रहे हैं। इसी आशा में वे हर बार वोट तो अपना सीएम बनाने के लिए ही डालते हैं, लेकिन बार-बार हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई सीएम की कुर्सी से बहुत दूर रह जाते हैं। विकास के नाम पर इस हलके के लोग आज भी चौधरी भजनलाल को ही याद करते हैं। विकास कार्य न होने पाने से इलाके में निराशा भी अब इतनी बढ़ गई है कि पूरा हलका दो धड़ों में बंटा हुआ नजर आता है। कुलदीप पर से विश्वास डगमगाने लगा है।
यहां इनेलो और कांग्रेस ने जाट प्रत्याशी उतारे हैं, वहीं बिश्नोई समाज से हजकां प्रमुख अकेले हैं। ऐसे में नजर एससी के वोट बैंक पर है।
छवि तो ठीक है, लेकिन वैसा उत्साह नहीं है
प्रमुख प्रत्याशियों की छवि और अतीत लगभग बेदाग है। हजकां और इनेलो के दोनों की टीम में वैसा उत्साह नहीं है, जैसा चुनाव जिताने वाली टीम में होना चाहिए। कुलदीप बिश्नोई चुनाव घोषित होने के बाद पहली बार 1 अक्टूबर को हलके में जाएंगे। हालांकि उनके बेटे और साली ने कमान संभाली है। इनेलो प्रत्याशी कुलबीर डोर टू डोर संपर्क में जुटे हैं।
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