करनाल. इस तस्वीर में धान की फसल पर मकड़ियों ने अपना डेरा डाल रखा है। जाल बनाकर। जाल ऐसा, जैसे करीने से किसी बुनकर ने सूत से बांध रखे हों। दरी बुनने के लिए। हरियाणा, पंजाब और हिमाचल में ऐसी मान्यता है कि धान में मकड़ी जाला बनाने लग जाए, तो मानसून की विदाई हो जाती है। बारिश नहीं होती है। गोस्वामी तुलसीदास ने भी रामचरित मानस में लिखा है- ...फूलें कास सकल महि छाई। जनु बरषा कृत प्रगट बुढ़ाई। यही मान्यता मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश में भी है कि कास पर फूल लगते ही बारिश खत्म हो जाती है।
> 11.41 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई, 7 लाख में है बासमती
> 201.20 मिलीमीटर हो चुकी है अब तक प्रदेश में वर्षा
> 434.00 मिमी होनी चाहिए थी 54% कम बरसा है मानसून
मौसम विभाग का तर्क
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक बार फिर से मानसून की लाइन बन रही है। यह लाइन हरियाणा से उत्तर प्रदेश होकर बिहार तक गई है। बावजूद इसके भारी बारिश के आसार नहीं हैं। वैसे छिटपुट बारिश हो सकती है।
बढ़ेगी ठंड
अब तापमान में गिरावट आएगी। ठंड बढ़ेगी। औसत अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम औसत से नीचे 20 डिग्री के आसपास रहेगा।फोटो व रिपोर्ट | सुशील भार्गव