विश्लेषण : गिरिराज अग्रवाल
दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिली ऐतिहासिक जीत ने सभी को चौंका दिया है। तमाम सर्वे, एग्जिटपोल और मीडिया रिपोर्ट्स के साथ-साथ बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के अनुमान भी गड़बड़ा गए हैं। देश की राजधानी दिल्ली की करीब 96 प्रतिशत सीटें जीतना कोई मामूली बात नहीं है। संभवतः किसी एक व्यक्ति के नाम पर एक ही पार्टी को मिली यह अब तक की सबसे बड़ी जीत है।
इन चुनावी नतीजों का हालांकि सभी लोग अपने-अपने ढंग, परिस्थितियों और अलग-अलग एंगल से विश्लेषण कर रहे हैं। लेकिन अगर हरियाणा के संदर्भ में देखें तो ये नतीजे हरियाणा की राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करेंगे। इसकी वजह यह है कि प्रदेश के अधिकांश जिले एनसीआर रीजन में हैं। इसलिए दिल्ली और हरियाणा की राजनीतिक घटनाओं का एक-दूसरे पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।
अगर भाजपा सूत्रों की ही मानें तो दिल्ली के चुनाव परिणाम पार्टी के बड़े नेताओं का आम कार्यकर्ता से ज्यादा सर्वे एजेंसियों पर भरोसा करना, मूल कार्यकर्ताओं के बजाय बाहरी लोगों को तवज्जो देना और केंद्र एवं राज्य की भाजपा सरकार की नॉन परफॉरमेंस का नतीजा है।
इसके अलावा कर्मचारियों की रिटायरमेंट एज के मुद्दे ने भाजपा की कथनी और करनी का अंतर भी साबित किया है। पूरे चुनाव में पीएम मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष
अमित शाह समेत तमाम नेताओं का अरविंद
केजरीवाल को ही टारगेट करना भी पार्टी के लिए नुकसानदायक रहा।
दिल्ली के चुनावी नतीजों से आम आदमी पार्टी का छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी आज काफी उत्साहित है। हरियाणा के चुनाव में हालांकि अभी करीब पौने पांच साल बाकी हैं। प्रदेश में संगठन खड़ा करने औऱ आधार तैयार करने के लिए यह वक्त काफी है।
इस दौरान पार्टी अगर संगठन खड़ा करके आम आदमी की समस्याओं के लिए संघर्ष करे तो अगले चुनाव में यहां भी सुखद नतीजे मिल सकते हैं। जैसा कि आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों ने कहना भी शुरू कर दिया है कि हरियाणा में भी वे आम आदमी की समस्याओं को लेकर संघर्ष करेंगे। कुछ दिन बाद ही आने वाले पंचायत और पालिका चुनाव से ही आम आदमी पार्टी अपना जनाधार बनाना शुरू कर सकती है। पड़ोसी प्रदेश पंजाब विधानसभा चुनाव में 2 साल बाकी हैं। वहां आप पार्टी के 4 सांसद भी हैं, इसलिए वह वहां अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।
गठबंधन का दौर समाप्ति की ओर
इन नतीजों का दूसरा पहलू यह भी माना जा सकता है कि देश का वोटर बदल रहा है, लेकिन नेता और पार्टियां बदलने को तैयार नहीं हैं। बिहार, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र राज्यों समेत लोकसभा चुनाव के नतीजे साफ बताते हैं कि वोटर अब लंगड़ी-लूली सरकार के नुकसान अच्छी तरह से समझ चुका है। वह जिसे भी मौका दे रहा है तो पूर्ण बहुमत के साथ।
नतीजे देने वालों को ही मिलेगा राज
आजादी के 68 साल बाद भी पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई, सड़क, सीवरेज, रोजगार जैसी मूलभूत समस्याएं जस की तस हैं। इन सालों में देश का कम और नेताओं एवं उनके परिवारों का विकास ज्यादा हुआ है। लेकिन ये सब अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है। एक के बाद एक आ रहे चुनाव नतीजों से स्पष्ट है कि अब राजनीति में वही राजनीतिक दल और नेता सरवाइव कर पाएंगे जो काम करके दिखाएंगे।
प्रदेश में नया हेल्पलाइन नंबर जारी करेगी आप
प्रदेश में संगठन को फिर से सक्रिय करने के लिए पार्टी अब नया हेल्पलाइन नंबर जारी करेगी। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य नवीन जयहिंद ने भास्कर को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पार्टी की ओर से हरियाणा के लिए पूर्व में जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर 09991001001 को लेकर कुछ टेक्निकल प्रॉब्लम हो गई है।