पानीपत। विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। प्रदेश में सबसे बड़ा चुनाव का मुद्दा क्या होना चाहिए, इस पर दैनिक भास्कर ने शहर के लोगों के साथ फोकस ग्रुप डिस्कशन किया। सभी ने भ्रष्टाचार आैर भेदभाव को सबसे बड़ा मुद्दा बताया। इसके बाद लालफीताशाही, गुडगवर्नेंस, शिक्षा और स्वास्थ्य को रखा।
ईमानदार को चुनें
एक-दूसरे पर ही आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं। हम सब जानते हैं कि वोट तो हम ही डालते हैं। जब वोट ही गलत को दे दिया तो फिर सुविधा की आशा क्यों करना। इसलिए सबसे बड़ा मुद्दा होना चाहिए मतदाता की सोच में बदलाव। ईमानदार प्रत्याशी को चुनिए। फिर देखिए बदलाव कैसे नहीं हाेता।'
- नेमचंद जैन, सामाजिक कार्यकर्ता।
मैं मानता हूं भ्रष्टाचार और बाबूशाही सबसे बड़ा मुद्दा है। क्या ये गलत नहीं हैं कि एक जगह पर मुख्यमंत्री आते हैं और वहां पर सड़कों को चमका दिया जाता है। वहीं, उसके साथ की सड़कों को देखा भी नहीं जाता। अफसर लोग केवल जी हजूरी के लिए ऐसा करते हैं। विकास तो समान रूप से होना चाहिए।'
- गुरदीप, सेक्टर 18 वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान
समान रूप से विकास होना चाहिए
भ्रष्ट नेताओं को कतई न चुनिए। समस्याएं खुद ही दूर हो जाएगी। हम लोग किले पर रहते हैं। नगर पालिका और नगर परिषद से हमें राहत मिली थी। लेकिन अफसरों की लापरवाही और लालफीताशाही के कारण हम पर बेघर होने की नौबत आ गई है। भ्रष्टाचार के कारण ही ऐसा हो रहा है।'
- दीपक अरोड़ा, किला संघर्ष समिति के प्रधान।
हरियाणा में समान विकास का मुद्दा होना चाहिए। ऐसा लगता है कि केवल एक ही जगह काम हो रहे हैं। इस कारण प्रदेश का संतुलन बिगड़ गया है। अगर समान रूप से विकास होता तो हरियाणा के नेताओं को विकास के नाम पर वोट न मांगने पड़ते।'
- स्वरूपानंद, एसडी कॉलेज के प्रोफेसर।
भूमि अधिग्रहण की सख्त नीति बनानी होगी। हालांकि इस बारे में सरकार ने काफी काम किए हैं, लेकिन अभी और भी जरूरत है। इसके अलावा सीएलयू के नाम पर काफी भ्रष्टाचार हुआ है। जमींदार और आम किसानों की बात करने वाला कोई नहीं है।'
- मनोज जागलान, एडवोकेट
सिस्टम में नहीं हुआ सुधार
बिजली देने का वादा कर कांग्रेस सत्ता में आई, लेकिन आज तक सिस्टम में सुधार नहीं हुआ। बिजली विकास की धुरी है। बावजूद इसके हमें बिजली नहीं मिल रही। हम दूसरे देशों से प्रतिस्पर्धा में उत्पादन कर ही जीत सकते हैं, लेकिन बिजली न मिलने के कारण हम पिछड़ जाते हैं।'
- विनोद खंडेलवाल, उद्योगपति
इंडस्ट्री की बात करने वाले को वोट मिलना चाहिए। दरअसल, अगर उद्योग होंगे तो रोजगार होंगे और रोजगार से समाज और प्रदेश का विकास होगा। तरह-तरह के टैक्स लगाकर इंडस्ट्री को पीछे धकेला जाता है।'
- प्रीतम सचदेवा, उद्योगपति।
शिक्षा का स्तर सुधारना होगा। आज हाल यह है कि हम अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना नहीं चाहते। निजी स्कूलों में भी फीस इतनी बढ़ गई है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दिला पाते। सरकार ऐसी हो जो शिक्षा पर गंभीरता से काम करे।'
- राकेश चुघ, उद्योगपति
वोट के बाद किसानों को भूल जाते हैं
नेता वोट मांगने आते हैं और किसान की बात ही भूल जाते हैं, जबकि सच ये है कि प्रदेश की सबसे बड़ी आबादी किसानों की है। खेतीबाड़ी से ही अन्य उद्योग भी चलते हैं। हालात ये हैं कि किसान कर्ज लेकर फसल लगाता है और फिर इसी कर्ज के नीचे दबा रह जाता है।'
- नकुल छौक्कर
बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा है। योग्य युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, जबकि रिश्वत देकर अयोग्य लोगों की भर्ती आसानी से हो जाती है। सबसे पहले इस पर रोक लगनी चाहिए। भ्रष्ट नेता को हमें चुनकर ही नहीं भेजना चाहिए।'
- सतेंद्र सिंह, बार एसोसिएशन के प्रधान।
लालफीताशाही के कारण कई समस्याओं ने जन्म ले लिया है। प्रदेश की आम जनता के लिए सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। हमारे प्रदेश के अस्पताल खुद ही बीमार हैं। आखिर आम आदमी को मिल क्या रहा है। हमारे जागरूक होने पर ही सुधार होगा।'
- रोशनलाल गुप्ता, उद्योगपति
(फोटो- दैनिक भास्कर कार्यालय में हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर फोकस ग्रुप डिस्कशन में मौजूद लोग।)