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कल की चिंता: सर्वे बढ़ा रहे भाजपा की चिंता, इनेलो दे रहा पुराने रिश्तों का हवाला

7 वर्ष पहले
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पानीपत। बिखरा जनमत (हंग असेंबली) आने की दशा में 46 का जादुई आंकड़ा कैसे जुटेगा, भाजपा और इनेलो में इसी पर मंथन शुरू हो गया है। दोनों दलों के नेताओं के बयानों से ऐसे संकेत भी मिलने लगे हैं। करनाल से भाजपा सांसद अश्विनी चोपड़ा ने तो बगैर लाग-लपेट के कह दिया कि पार्टी को बहुमत न मिला तो हजकां से दोबारा हाथ मिलाने में संकोच नहीं होगा।
हालांकि पार्टी इसे चोपड़ा की निजी राय करार दे रही है। पार्टी प्रवक्ता वीर कुमार यादव कहते हैं कि इस बार भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलेगा। दूसरी तरफ एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में इनेलो नेता अभय चौटाला ने माना कि उनकी पार्टी के भाजपा के साथ अच्छे रिश्ते रहे हैं। वैसे, चौटाला भी पूर्ण बहुमत मिलने का दावा करते हैं। पंजाब में अकाली सांसद प्रो. प्रेमसिंह चंदूमाजरा कह चुके हैं कि कांग्रेस को हराने के लिए भाजपा और इनेलो को साथ लाने में उनकी पार्टी मध्यस्थ की भूमिका निभाएगी।
भाजपा के पास 3, इनेलो के पास 2 विकल्प
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अश्विनी शर्मा कहते हैं कि यदि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनती है लेकिन बहुमत से दूर रहती है तो उसके पास इनेलो, हजकां, निर्दलीय या छोटे दलों को साथ लाने का विकल्प होगा। सबसे बड़ा दल बनने की स्थिति में इनेलो के पास भाजपा या निर्दलीय-छोटे दलों का ही विकल्प होगा। कांग्रेस के पास हजकां-निर्दलीय-छोटे दलों का ऑप्शन होगा।
ऐसी चर्चाएं क्यों?
> प्रारंभिक सर्वे भाजपा को सबसे बड़ा दल बनने का इशारा कर रहे हैं लेकिन इनेलो और कांग्रेस भी नेक-टू-नेक हैं। यानी समीकरण कुछ भी हो सकते हैं।
> गैर कांग्रेसी सरकार के लिए भाजपा और इनेलो के गठबंधन का फार्मूला पहले भी दो बार कामयाब हो चुका है।
> 2009 में किसी को बहुमत नहीं मिला। 40 सीटें जीतकर कांग्रेस को बहुमत के लिए बागियों-निर्दलीयों का सहारा लेना पड़ा।
> कई राज्यों के उपचुनावों के नतीजों से भाजपा को झटका लगा है। हरियाणा में भी मोदी फेक्टर न चला तो ऐसे समझौते की जरूरत बन सकती है।
अड़चन क्या?
सीएम की कुर्सी

लोकसभा चुनाव में प्रदेश के 52 हलकों में बढ़त बनाने के बाद भाजपा पहली बार अपने बूते सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है। इनेलो भी सत्ता से 10 साल का वनवास खत्म करने को आतुर है। सीएम की कुर्सी समझौता की राह में सबसे बड़ी अड़चन रहेगी।
ऐसी नौबत ही नहीं आएगी कि भाजपा को चुनाव के बाद किसी दल से समझौता करना पड़े।
-ओपी धनखड़, अध्यक्ष, भाजपा किसान मोर्चा