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डाउनलोड करेंपानीपत. ‘मैं आज गोभक्तों के साथ सीएम हाउस में पहुंच था। उम्मीद थी कि सुबह छह बजे तो टेनिस खेलते समय सीएम साहब से मुलाकात होगी और मैं अपने दिल की बात रखूंगा। मेरे दिल की बात दिल में ही रह गई क्योंकि सीएम को गायों की पीड़ा से अधिक राहुल गांधी प्यारे थे।
मैं यह नहीं चाहता था कि मुझे अधिक वक्त दें, लेकिन इतना जरूर चाहता था कि वह दूसरे दिन कम से कम मेरी बात तो सुन लें क्योंकि लोग यह कहते हैं कि मैं बीच का रास्ता नहीं अपनाता। सीधे अनशन की बात कहता हूं। इसका जवाब देने के लिए मैं आज सीएम हाउस आया था लेकिन जब सीएम मुझसे मिले बिना राहुल गांधी के कार्यक्रम में चले गए तो मैं बहुत आहत हुआ हूं। मैं कहां अपने लिए सीएम से मिलने आया था। मैं तो गो माता के लिए चारा चाहता हूं, जिसे जबरन कुछ लोग खाने की कोशिश कर रहे हैं।
मैं मन में यह प्रण लेकर आया हूं कि अब नहीं आऊंगा सीएम के पास। अब मेरे पास वक्त नहीं है। मुझे गाय माता के लिए बहुत कुछ करना है। करनाल पहुंचते ही सत्याग्रह का शंखनाद कर दिया। इससे पहले सोनीपत में भी अनशन किया था। दो दिन में पानीपत, हिसार, नरवाना में भी अनशन शुरू होगा। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में अनशन। धरने व विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
लोग कहते थे कि मैं अकेला ही चलता हूं तो मैं उन्हें बता देना चाहता हूं कि शुरुआत तो अकेले ही होती है। अब इस पावन कार्य में हजारों गोभक्त आगे आ गए हैं। करनाल में ही मुझे सूचना मिली कि आज ढांढ में बीस के करीब गायें जल गई हैं क्योंकि उनके पास भागने का रास्ता नहीं था। तूड़ी में आग लग गई थी।
मैं वहीं रोने लगा। यदि इन गायों के पास गोचरान भूमि होती तो यह भी आजाद घूमतीं और यह कष्टदायी दिन इन्हें न देखना पड़ता। गोशाला में लगी आग अब मेरे मन में लगी है। आज गायों के साथ-साथ मेरा मन भी जला है। इन्हें न्याय मिलना चाहिए। गोचरान भूमि गायों को मिलनी चाहिए और अब हम गोभक्त इसे लेकर ही रहेंगे। हो सकता है मेरी इस काम में देह न रहे, लेकिन आत्मा तो रहेगी ही। जैसा कि सीएम हाउस से चलने के बाद संत गोपालदास ने संवाददाता संदीप साहिल को सेलफोन पर बताया।
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