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प्रतिनिधियों का दो टूक: चुनाव लड़ना है तो खाप के पद छोड़कर कहीं भी जाएं

7 वर्ष पहले
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जींद। राजनीतिक लाभ लेने के लिए खापों को पटाने में जुटे राजनीतिक दलों को झटका लगा है। साथ ही उन खाप नेताओं को भी जो इन सामाजिक संगठनों के नाम पर राजनीति में गोटी फिट करने में लगे हैं। असल में सोमवार को जींद की जाट धर्मशाला में कई खापों के प्रतिनिधियों ने दो टूक कह दिया-राजनीति में जाना है तो खाप के पद छोड़ें। अभी तो यह शुरुआत है, कई और खाप इस मुहिम में जुड़ सकती हैं।

ढुल खाप के प्रधान इंद्र सिंह ढुल, बराह खाप के प्रधान कुलदीप ढांडा, राखी बारहा खाप के प्रधान सुरेश कोथ, बहतरा खाप के प्रधान केके मिश्रा, नंदगढ़ बारहा के प्रतिनिधि होशियार सिंह दलाल, कंडेला खाप के प्रेस प्रवक्ता जगत सिंह रेढू ने कहा कि खापों का किसी भी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है। सूबे सिंह समैण खापों के प्रवक्ता नहीं हैं। न ही नफे सिंह नैन खापों के प्रधान हैं। वे केवल अपनी खाप के प्रतिनिधि होंगे। इन लोगों को सभी खापों के बारे में बयान देने के लिए अधिकृत नहीं किया है। यही नहीं सर्व जाट खाप का कोई संगठन नहीं है।

इधर, सर्व जातीय दाड़न खाप पालवां के प्रधान एडवोकेट सतपाल श्योकंद ने पालवां चबूतरे पर कहा कि जो खापों के प्रतिनिधि चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं, वे अपने पदों से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ें ताकि खाप, पंचायतों की मर्यादाओं को ठेस न पहुंचे।

बैनर इस्तेमाल करना गलत
खाप प्रतिनिधियों ने कहा कि जिसे चुनाव लड़ना है अपने रसूख से चुनाव लड़े, न कि किसी खाप के बैनर का सहारा लेकर। 1300 साल का इतिहास रहा है कि खापें सामाजिक काम करती आई हैं।
आज की खबर-
> 85 से ज्यादा खाप सक्रिय हैं प्रदेश में।
> 1300 साल का इतिहास।