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सरस्वती स्थली के इस शिवलिंग पर वर्ष में एक बार प्रकट होता है नाग-नागिन का जोड़ा

देवी सरस्वती ने श्राप से मुक्ति के लिए यहां की थी भगवान शिव की अराधना।

Dainik Bhaskar

Feb 17, 2015, 09:51 AM IST
शिवलिंग के पास नाग की फोटो लेते मंदिर के पुजारी। शिवलिंग के पास नाग की फोटो लेते मंदिर के पुजारी।

फोटो: विकास राणा

पिहोवा (कुरुक्षेत्र)। आज महाशिवरात्रि के दिन देवों के देव महादेव की स्तुति की जाती है। इसी क्रम में पिहोवा से लगभग पांच किमी. उत्तर पूर्व में अरुणाय में भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर भी है, जहां वर्ष में एक बार नाग नागिन का जोड़ा प्रकट होता है, जो किसी को बिना नुकसान पहुंचाए भगवान शिव की परिक्रमा कर चला जाता है। श्रद्धालु इसे भगवान का चमत्कार मानते हैं। धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के सबसे प्राचीन मंदिर में से एक इस मंदिर की मान्यता है कि यहां देवी सरस्वती ने श्राप से मुक्त होने के लिए भगवान शिव की अराधना की थी। तभी इस शिवलिंग की स्थापना हुई थी।

यह तीर्थ अरुणा व सरस्वती के संगम पर स्थित है। मंदिर के पास से सरस्वती नदी होकर निकलती है। पुराणों के अनुसार महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र ऋषि में एक दूसरे से अधिक तपोबल हासिल करने की होड़ लगी हुई थी। तब विश्वामित्र ने सरस्वती को छल से महर्षि वशिष्ठ को अपने आश्रम तक लाने की बात कही, ताकि वे महर्षि वशिष्ठ को समाप्त कर सकें। श्राप के डर से सरस्वती तेज बहाव के साथ सरस्वती, महर्षि वशिष्ठ को विश्वामित्र आश्रम के द्वार तक ले आई। लेकिन जब विश्वामित्र महर्षि वशिष्ठ की ओर बढऩे लगे तो सरस्वती महर्षि वशिष्ठ को पूर्व की ओर बहा कर ले गई।

इससे विश्वामित्र क्रोधित हो गए और सरस्वती को खून से भरकर बहने का श्राप दे दिया। खून का बहाव शुरू होने पर सरस्वती के किनारे राक्षसों ने डेरा डाल लिया। महर्षि वशिष्ठ ने सरस्वती को यहां प्रकट हुए शिवलिंग की अराधना करने को कहा। सरस्वती ने इसी तीर्थ पर शिव की अराधना की तो भगवान शिव ने उसे विश्वामित्र के श्राप से मुक्त कर फिर से जलधारा से भर दिया। तभी से यहां भगवान शिव की अराधना शुरू हो गई।

हर वर्ष लगता है मेला, पहुंचते हैं लाखों श्रद्धालु

आसपास के कई प्रदेशों में बड़ी मान्यता है। यहां महाशिवरात्रि के मौके पर वार्षिक मेला लगता है। मान्यता है कि यहां शिवलिंग पर जलाभिषेक व पूजन करवाने और यहां स्थित बेल वृक्ष पर धागा बांधने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

दूध बिलोकर नहीं निकाला जाता है मक्खन

मंदिर में एक अन्य मान्यता है कि यहां दूध बिलोकर मक्खन नहीं निकाला जाता। यदि कोई प्रयास करता है तो दूध खराब हो जाता है।

आगे की स्लाइड में देखें अन्य फोटो..................

शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता। शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता।
शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता। शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता।
अरुणाय स्थित भगवान शिव मंदिर का शिवलिंग। अरुणाय स्थित भगवान शिव मंदिर का शिवलिंग।
अरुणाय स्थित शिव मंदिर के बाहर का दृश्य। अरुणाय स्थित शिव मंदिर के बाहर का दृश्य।
अरुणाय स्थित भगवान शिव मंदिर का शिवलिंग। अरुणाय स्थित भगवान शिव मंदिर का शिवलिंग।
शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता। शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता।
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शिवलिंग के पास नाग की फोटो लेते मंदिर के पुजारी।शिवलिंग के पास नाग की फोटो लेते मंदिर के पुजारी।
शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता।शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता।
शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता।शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता।
अरुणाय स्थित भगवान शिव मंदिर का शिवलिंग।अरुणाय स्थित भगवान शिव मंदिर का शिवलिंग।
अरुणाय स्थित शिव मंदिर के बाहर का दृश्य।अरुणाय स्थित शिव मंदिर के बाहर का दृश्य।
अरुणाय स्थित भगवान शिव मंदिर का शिवलिंग।अरुणाय स्थित भगवान शिव मंदिर का शिवलिंग।
शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता।शिवलिंग के पास प्रकट नाग देवता।
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