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कोर्ट में एसडीएम और वकील भिड़े, बार ने किया वर्क सस्पेंड

8 वर्ष पहले
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पानीपत. अपने ही कोर्ट में एसडीएम अश्विनी मलिक और एडवोकेट जगबीर मलिक के बीच हुई कथित झड़प के बाद बार एसोसिएशन ने शुक्रवार को काम न करने की घोषणा कर दी। मसला गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे एसडीएम कोर्ट का है।

एडवोकेट जगबीर मलिक एक लड़की के लापता होने के केस में एसडीएम कोर्ट में सर्च वारंट जारी करवाने के लिए पेश हुए। इस दौरान अंग्रेजी में लिखे प्रार्थना पत्र पर एसडीएम और वकील के बीच बहस हो गई। जानकारी के मुताबिक प्रार्थना पत्र पर लड़की की उम्र को लेकर एसडीएम सहमत नहीं थे, जबकि वकील का दावा था कि वह नाबालिग है। वकील जगबीर मलिक का आरोप है कि इस दौरान एसडीएम अश्विनी मलिक ने न सिर्फ अभद्र व्यवहार किया बल्कि उनका हाथ पकड़कर कोर्ट से बाहर निकाल दिया।

वहीं, एसडीएम मलिक का कहना है कि प्रार्थना पत्र अंग्रेजी में लिखा था जबकि लड़की के माता-पिता के अंगूठे लगे थे। उनको यह पता नहीं था कि प्रार्थना पत्र में लिखा क्या है? प्रार्थना पत्र में लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम थी जबकि पूछने पर उसे बालिग बताया गया। इसी बात पर कोर्ट ने आपत्ति की और वकील जगबीर मलिक को चेतावनी दी कि उनकी शिकायत बार एसोसिएशन में की जाएगी। इसके बाद कोर्ट से बाहर चले जाने के निर्देश दे दिए गए। उनसे कोई बदसलूकी नहीं की गई।

उधर, जगबीर मलिक ने इस प्रकरण की लिखित शिकायत बार एसोसिएशन को दी। बार में शाम बैठक बुला ली गई। इसी बैठक में सर्वसम्मति से शुक्रवार को वर्क सस्पेंड रखने का निर्णय लिया गया।

गलती नहीं मानी तो हड़ताल रहेगी जारी : सतेंद्र

बार एसोसिएशन के प्रधान सतेंद्र सिंह का कहना है कि उनके पास लिखित शिकायत की गई है। वकील जगबीर मलिक के मुताबिक एसडीएम अश्विनी मलिक ने उनसे बदसलूकी की है। मलिक को जबरन कोर्ट से बाहर निकाल दिया गया, जो कि गलत है। शनिवार को बार एसोसिएशन के पदाधिकारी डीसी समीरपाल सरो से मिलेंगे। अगर एसडीएम ने अपनी गलती नहीं मानी तो स्ट्राइक आगे भी जारी रहेगी। इस मामले में एडवोकेट जगबीर मलिक की गलती नहीं है। अगर एसडीएम को परेशानी थी तो एडवोकेट को बेइज्जत नहीं करना चाहिए था। वे एडवोकेट का समर्थन करते हैं और उनके लिए अपना समर्थन जारी रखेंगे।