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डाउनलोड करेंमनोज ठाकुर/धर्मेश पांडेय/नरेंद्र शर्मा. चंडीगढ़/सोनीपत. स्पेशल इकनॉमिक जोन (सेज) को लेकर प्रदेश में फिर हल्ला मचा है। मई में सूरज की बढ़ती तपिश के बीच सेज की जमीन पर उद्योगों की जगह औद्योगिक-आवासीय कॉलोनी बसाने के सरकार के फैसले ने सियासी तापमान कई डिग्री बढ़ा दिया है। समूचा विपक्ष इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरने में लगा है।
सत्तारूढ़ कांग्रेस के कई नेता भी अपनी सरकार के फैसले पर अंगुली उठा रहे हैं लेकिन इस तमाशे के बीच उन हजारों किसानों की सुध कोई नहीं ले रहा, जिनकी जमीन सात-आठ साल पहले सेज के लिए ले ली गई थी। इनमें से सैकड़ों किसान ऐसे हैं जिन्हें आज तक अपनी जमीन के पूरे पैसे भी नहीं मिले। सोनीपत के भिगान और कुराड़ गांव के करीब सौ किसानों से सेज के लिए जमीन ली गई थी। इनमें से तकरीबन २क् फीसदी किसानों को आज भी जमीन के पूरे पैसे मिलने का इंतजार है।
सेज के लिए प्रदेश में सबसे अधिक जमीन गुड़गांव-फरीदाबाद जिलों में ली गई थी। सोनीपत, झज्जर, मेवात व पलवल जिलों में भी कई सेज मंजूर हुए। भास्कर ने यहां के किसानों से बातचीत कर उनके हालात को समझा। जाना कि कैसे उनके सपने टूटे।न बच्चों को रोजगार मिला और न जमीन बची। मुआवजे के रूप में जो पैसा मिला था, वह भी सात-आठ बरसों में खर्च हो गया। आज इनके पास न जमीन बची है और न पैसा।
‘मैंने 2007 में चार एकड़ जमीन नरेश जग्गी व संजय साहनी को बेची थी (बाद में इस जमीन पर अंसल का सेज बना।)। जमीन का आधा पैसा आज तक नहीं मिला। कई बार कंपनी के चक्कर भी लगाए। जमीन बेचने पर जो पैसा मिला, उसमें से कुछ परिवार की जरूरतों पर खर्च हो गया जबकि कुछ से गांव में ही जमीन खरीद ली। जमीन खरीदने वालों ने बताया था कि यहां उद्योग-धंधे लगेंगे। एक आस थी कि उद्योगों में मेरे दोनों बेटों को भी काम मिल जाएगा। आज दोनों बेरोजगार हैं। दिल की बात कहूं तो जमीन बेचकर घाटे में रहा।’
भुल्लाराम, किसान, भिगान गांव, सोनीपत
‘मेरे पास साढ़े चार एकड़ जमीन थी जिसमें से दो एकड़ सेज के लिए नरेश जग्गी और संजय साहनी ने खरीदी थी। जो पैसे मिले, उससे गांव में ही दूसरी जगह कुछ जमीन ले ली। हालांकि 2007 में जमीन बहुत सस्ते में चली गई। मेरे दो बेटे हैं। दोनों दिल्ली की फैक्ट्री में काम करते हैं। यदि सेज बन जाता तो दोनों को यहीं पर कोई काम मिल जाता। रोज दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी पड़ती। गांव का विकास भी होता लेकिन सारे सपने अधूरे रह गए। सरकार की नई घोषणा से हमारी उम्मीदों को झटका लगा है।’
धर्मपाल, किसान, भिगान गांव, सोनीपत
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