रेवाड़ी. बॉलीवुड के "हमशक्लस' तो आपने 2014 में देखे होंगे, लेकिन प्रदेश की राजनीति के हमशक्लस की कहानी शायद ही आपको पता हो। एक कहानी जो प्रदेश बनने से पहले शुरू हुई, वैसी ही कहानी 2001 में दोहराई गई। दरअसल, ये कहानी है कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयू) के दो वाइस चांसलर की। वीसी का पद छोड़कर आए हरद्वारीलाल ने राजनीति में धाक जमाई और फिर वीसी बन गए। इसी तरह डॉ. एमएल रंगा ने भी केयू से वीसी का पद छोड़ा और सरकार में मंत्री बने। उसके बाद फिर वीसी बन गए। दोनों राजनीति में अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि लाए गए। हरद्वारीलाल अब दुनिया में नहीं हैं, लेकिन डॉ. रंगा वीसी का पद छोड़कर जरूर इस सत्यकथा को आगे बढ़ा रहे हैं।
कैरो ने शिक्षा मंत्री बनाने का लालच देकर छुड़वा दिया वीसी का पद
1962 के आसपास की बात है। संयुक्त पंजाब के सीएम प्रताप सिंह कैरो ने केयू के वाइस चांसलर हरद्वारीलाल के पास बुलावा भेजा कि शिक्षा मंत्री बनना है तो पद छोड़कर आ जाओ। हरद्वारीलाल ने पद छोड़ा तो कैरो ने उन्हें बहादुरगढ़ से कांग्रेस का टिकट देकर विधायक बनवा दिया, लेकिन शिक्षा मंत्री नहीं बनाया। नाराज हरद्वारीलाल चौधरी देवीलाल के संपर्क में आ गए और 1967 में हरियाणा गठन के पहले चुनाव में एमएलए बनकर पंडित भगवत दयाल शर्मा की सरकार में शिक्षा मंत्री बन गए। 13 दिन में सरकार गिर गई। सन् 1968 में जब उन्हें टिकट नहीं मिला तो वह चुपचाप बैठ गए। 1977 में देवीलाल ने उन्हें एमडीयू का वीसी बना दिया। इसके बाद राजनीति मेंं नहीं आए।
मैं फिर बनूंगा मंत्री : झज्जर के गांव झारा निवासी हरद्वारीलाल पहली बार शिक्षा मंत्री बने तो हिसार के राजकीय कॉलेज ने उन्हें मुख्य अतिथि बुलाया। जिस दिन वे पहुंचे, उसी दिन सरकार गिर गई थी। प्राचार्य जेडी वर्मा ने कहा कि समझ में नहीं आता कि अब हम आपको क्या कहकर बुलाएं। हरद्वारीलाल ने कहा कि दोबारा वह इसी पद पर रहेंगे। हुआ भी यहीं, संयुक्त विधायक दल क बैनर तले बनी राव बीरेंद्र की सरकार में शिक्षा मंत्री बने।
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