( सबइंस्पेक्टर मुनेश (ट्रैक सूट में) को सामान्य अस्पताल में मेडिकल के लिए ले जाते हुए।)
पानीपत। एक समय था, जब मुनेश पानीपत में पहली महिला चौकी इंचार्ज बनी। स्वतंत्रता दिवस समारोह में पिछले मुख्यमंत्री से बेहतर कार्य करने पर सम्मान भी हासिल किया। किस्मत ने मोड़ लिया तो मारपीट के मामले में कार्रवाई करने की एवज में रिश्वत मांगने के आरोप लग गए। सबइंस्पेक्टर पद पर पहुंच चुकी मुनेश को सस्पेंड कर दिया गया।
मामले ने पीछा नहीं छोड़ा और शिकायत करने वाले पर समझौते का दबाव बनाने और धमकी देने का भी केस दर्ज हो गया। इस मामले में सबइंस्पेक्टर मुनेश, उसके कांस्टेबल पति सहित 12 लोग फंस गए। सम्मान पाने वाली सबइंस्पेक्टर मुनेश अब अपनी ही करनी के कारण खुद तो जेल गई, अन्य को भी संकट में डाल दिया। पति फरार है।
मारपीट के मामले में चौकी इंचार्ज ने नहीं की कार्रवाई
मूल रूप से उत्तरप्रदेश के शामली जिले के गांव लांक के रहने वाले विक्रांत मलिक की सेक्टर-25 पार्ट-2 में मां मोटर्स वर्कशॉप थी। इसका संचालन कोई और कर रहा है। सेक्टर-29 पुलिस को विक्रांत ने शिकायत दी। बताया कि उसकी साली आर्य कन्या स्कूल में पढ़ती है। बीबीएमबी कॉलोनी में रहने वाला मनदीप उसकी साली को आते-जाते तंग कर रहा था। 27 सितंबर, 2014 को वह अपने दोस्त अक्षय के साथ गाड़ी में बैठकर बीबीएमबी कॉलोनी में मनदीप के घर शिकायत करने पहुंचा। इस पर मनदीप ने अपने साथी सोनू, अमरजीत के साथ मिलकर उन पर हमला कर दिया। उसके सिर में रॉड मारकर उसे घायल कर दिया। सेक्टर 29 चौकी पुलिस ने धारा 148, 149, 323,341, 506 के तहत मनदीप और उसके दोस्तों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। चौकी इंचार्ज मुनेश ने कार्रवाई ही नहीं की।
रिश्वत मांगी तो हुई सस्पेंड
विक्रांत ने आरोप लगाए की मामले में कार्रवाई की एवज में तत्कालीन चौकी इंचार्ज मुनेश ने 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। उसने इसकी शिकायत एसपी को दी। 12 नवंबर को तत्कालीन एसपी बालन ने सब इंस्पेक्टर मुनेश को पद से निलंबित कर दिया था। बाद में मामले में तीन महीने बाद नए चौकी इंचार्ज ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया।
शिकायतकर्ता विक्रांत को धमकी देने पर मामला बन गया बड़ा
18 दिसंबर, 2014 को सिटी पुलिस ने मुनेश, आशीष, वेदपाल, महाबीर, राजू, सोनू, टीटू 4 अन्य के खिलाफ 365, 327, 465, 467, 471, 506, 120-बी के तहत केस दर्ज किया। विक्रांत ने फिर शहर पुलिस को शिकायत दी कि मुनेश, उसके कांस्टेबल पति आशीष ने कई साथियों के साथ उस पर समझौते का दबाव बनाया और समझौता करने पर जान से मारने की धमकी दी गई है। आरोपियों ने एसपी से मिलाने की बात कहकर फर्जी कागजात तैयार कराकर समझौता कराने के लिए उसका अपहरण कर लिया। जब साइन नहीं किए तो जान से मारने की धमकी देने लगे। उसने धमकी भरे फोन रिकाॅर्ड कर लिए। इसके बाद तो मामला और बिगड़ गया और मुनेश के साथ पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में भी जुट गई।
वर्दी में सम्मान, ट्रैक सूट में जेल
मुनेश को वर्ष 2014 की शुरुआत में तहसील कैंप चौकी इंचार्ज बनाया गया। उस समय वह शहर में पहली महिला चौकी इंचार्ज बनी। उसका रुतबा भी बढ़ा और नाम भी चमका। बाद में एएसआई से सबइंस्पेक्टर बना दी गई। 15 अगस्त, 2013 को सबइंस्पेक्टर मुनेश को बेहतरीन कार्य करने पर जिलास्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सम्मानित किया। वर्दी में सम्मान लेने वाली मुनेश को शनिवार को गिरफ्तार किया गया। वह ट्रैक सूट में अदालत पहुंची और फिर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सीआईए पर भी लगे आरोप
जनवरी में विक्रांत ने आईजी को सीआईए कर्मचारियों के खिलाफ भी शिकायत दी। उन्होंने बताया कि सेक्टर-25 में उनकी वर्कशाप को उसने किसी और को दे दिया है। आरोप लगाए कि सीआईए पुलिस के तीन कर्मचारी वर्कशाप पर पहुंचे और गाड़ियों के फर्जी कागजात बताते हुए थाने में पेश होने को कहा और पेश न होने पर मामला दर्ज करने की धमकी दी। बाद में आईजी के निर्देश पर सीआईए पुलिस में तैनात एक पुलिस कर्मचारी को
सोनीपत बदल दिया गया।