सबसे ज्यादा 41 बार कांग्रेस की जीतीं
सन् 1967 से 2009 तक 41 बार महिला उम्मीदवार कांग्रेस की टिकट से विधानसभा पहुंचीं। 5 बार जनता दल, इनेलो, 4 बार जनता पार्टी, तीन बार भाजपा, दो बार विशाल हरियाणा, दो बार हविपा, एक बार समता पार्टी से जीतीं।
तीन महिलाएं निर्दलीय विधायक बन सकीं
1982 में बल्लभगढ़ से शारदा रानी, 1987 में मेधावी, झज्जर से व 2005 में शकुंतला भगवाड़िया ने बावल से निर्दलीय विधायक बनकर अपनी धाक जमाई।
किन्नर होते हुए भी धन्नो को महिला प्रत्याशी माना
2000 के चुनाव में गुड़गांव विधानसभा चुनाव में किन्नर धन्नो देवी भी मैदान में उतरी थी। उसे केवल महज 1283 मत मिले। निर्वाचन विभाग के रिकाॅर्ड में धन्नो को महिला प्रत्याशी चुना गया है।
बंसीलाल को हराकर एमएलए बनीं चंद्रावती
हरियाणा की राजनीति से शुरुआत कर शिखर पर पहुंचने वालीं महिलाओं में केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का नाम सबसे आगे है। इसके अलावा 1972 में चंद्रावती ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल को हराकर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी थी। बाद में वह पुडुचेरी की उपराज्यपाल बनीं।
भाजपा-इनेलो की 116 उम्मीदवारों में 16 महिलाएं
2014 के चुनाव में भाजपा की जारी पहली 43 उम्मीदवारों की सूची में 6 महिलाएं हैं।
सोनीपत से कविता जैन, उचाना से प्रेमलता, सिरसा से सुनीता, अटेली से संतोष, पटौदी से विमला व बड़खल से सीमा त्रिखा शामिल है। इनेलो की 73 प्रत्याशियों की सूची में 10 महिलाएं हैं। इसमें साढौरा से पिंग छप्पर, नारनौल से कमलेश, समालखा से रामभतेरी, नांगल चौधरी से मंजू, इंद्री से ऊषा कश्यप, बेरी से संतोष दहिया, तोशाम से कमला देवी, भिवानी से निर्मला सर्राफ, बवानी खेड़ा से दयार भुरटाना व खरखौदा से अनिता खांडा शामिल है।
आंकड़े गवाह, अकेले महिलाएं बदल सकती हैं तस्वीर
74 लाख 81 हजार 851 वोटर महिलाएं
इस बार कुल एक करोड़ 62 लाख 60 हजार 139 मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे। 74 लाख 81 हजार 851 महिला वोटर हैं। इस संख्या से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार बनाने या गिराने में महिलाओं की कितनी बड़ी भूमिका है।