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  • This Time The Target Of 40 Million Tonnes Of Rice Exports

जनवरी में हटेगी एक्सपोर्ट से रोक, इस बार 40 लाख टन चावल एक्सपोर्ट का लक्ष्य

7 वर्ष पहले
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करनाल। ईरान में जनवरी के तीसरे सप्ताह में भारतीय चावल के एक्सपोर्ट से रोक हट जाएगी। रोक का कारण ईरान की अपनी राइस क्रॉप का मार्केट में आना है। पाकिस्तान से हमारा बासमती चावल बेहतर है। इसलिए डेढ़ सौ डाॅलर महंगा बिकता है। इस साल भारत ने 40 लाख टन चावल के एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा है।
अरब देशों में चावल एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी लामा राइस एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली के डायरेक्टर अजय शर्मा ने बताया कि भारत से विदेशों में जो चावल जाता है, उसमें हरियाणा का योगदान 80 प्रतिशत है। सबसे ज्यादा चावल सउदी अरब और ईरान में एक्सपोर्ट होता है। इसका प्रतिशत लगभग 60 से 70 है। भारत का किसान पाकिस्तान के किसान से ज्यादा एडवांस और एक्सपर्ट है। हरियाणा में मिलिंग, ग्रेडिंग और पैकेजिंग में दुनिया की एडवांस तकनीक को अपनाया गया है।
एक्सपोर्टर पर परमल खरीदने का बोझ
सरकार द्वारा परमल न खरीदने का बोझ राइस मिलर्स व एक्सपोर्टर पड़ रहा है। जबकि किसानों को फायदा देने के लिए चावल उद्योग को बढ़ाने को लेकर सरकार द्वारा प्राइवेट मिल को स्पॉट देनी होगी। एग्रीकल्चर पर टैक्स को हटाना होगा। विदेशों में हमारी बासमती की महक सबको लुभाती है लेकिन अब हमारी बासमती की पूसा-1121 का लंबा दाना विदेशों में उसकी डिमांड बढ़ा रहा है। कुवैत और अमेरिका में यह खपत और बढ़ने की उम्मीद है।
दुनिया में चावल की 4 हजार वैराइटी हैं। इसकी 11 हजार 500 साल पुरानी हिस्ट्री है। हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी यूपी और कोटा-बूंदी राजस्थान में बासमती पैदा होती है। लेकिन राइस इंडस्ट्रीज में करनाल जैसी तरक्की कहीं नहीं है। यहां पर पिछले 10 सालों में मिलिंग, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग में बेस्ट मॉडर्नाइजेशन हुआ है।