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क्या इतने रहमदिल हो सकते हैं अपहरणकर्ता, बाइक के साथ टोल नाके पर छोड़ा

9 वर्ष पहले
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पानीपत. ओल्ड हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर अशोक कुमार चोपड़ा का अपहृत इकलौता बेटा वरुण चोपड़ा 30 दिन बाद शनिवार रात को घर लौटा आया। वरुण के पिता ने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने वरुण को टोल प्लाजा पर कार से छोड़ा और फिर उसको उसकी बाइक की चाबी देकर घर जाने के लिए कहा।

अशोक कुमार अपने बेटे को मीडिया के सामने लाने से कतरा रहे हैं। उसे इलाज के लिए करनाल भेज दिया गया है। इससे यह केस अब और संदिग्ध हो गया है। उधर, पुलिस को वरुण के घर वापस आने का पता नहीं चला। पुलिस से पूछा गया तो जवाब मिला कि वरुण की तलाश में चार टीमें लगी हुई हैं।


गौरतलब है कि 19 वर्षीय वरुण चोपड़ा 24 जनवरी की शाम को 7:30 बजे घर से अपनी पल्सर बाइक से दोस्तों के साथ घूमने की बात कहकर निकला था। 9:45 बजे के बाद उसका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया।

घर वालों ने वरुण की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 25 जनवरी को अशोक चोपड़ा के सेलफोन पर वरुण के सेलफोन से कॉल आई। कॉल करने वाले ने धमकी दी कि वह अपने बेटे की सलामती चाहता है तो दो करोड़ रुपए का इंतजाम करें। थाना शहर पुलिस में वरुण के अपहरण की शिकायत दर्ज की गई।


पापा मुझे बचा लो, वे लोग मुझे मार डालेंगे : वरुण
॥मैं 24 जनवरी की रात 9:30 बजे घर के बाहर अपनी पल्सर बाइक लेकर खड़ा था। तभी एक कार रुकी। इसमें से एक युवक उतरा और उसने मुझसे किसी मकान का पता पूछा। मैं पता बताने लगा कि कार से दूसरा युवक उतरा और उसने कुछ नशीला पदार्थ सुंघा दिया।

इससे मैं बेहोश हो गया। युवक मेरा अपहरण करके ले गए और एक कोठरी में बंद कर दिया। मेरी आंखों पर पट्टी बांध दी। दो दिन बाद मुझे होश आया। अपहरणकर्ता कई थे, जो हरियाणवी व उत्तर प्रदेश की भाषा बोल रहे थे। वे मुझे सूखी रोटी देते थे।


पहले से मेरे घुटने पर चोट लगी थी, उसी पर डंडे से वार करते थे। 23 फरवरी की रात को एक कार में मुझे बैठाकर लाया गया। कार से तीन लोगों की आवाज आ रही थी। कार में से एक व्यक्ति ने बाइक की चाबी थमाकर मुझे धक्का दिया और बोला कि गड्ढे में तेरी बाइक पड़ी है।

चला जा, पीछे मुड़ा तो गोली मार देंगे। इसके बाद मैं बाइक लेकर 1:15 बजे घर लौट आया। अपहरणकर्ता मुझे बार-बार कहते थे कि तेरे घरवालों ने अपहरण की खबर पुलिस व मीडिया को दे दी है। तीस दिन की कैद मैं ताउम्र नहीं भुला पाऊंगा।'


(जैसा की वरुण ने अपने पिता अशोक कुमार चोपड़ा को आपबीती सुनाई और अशोक कुमार चोपड़ा ने दैनिक भास्कर को बताया। अशोक ने बताया कि वरुण रात को सोते हुए डर गया था और कह रहा था कि पापा मुझे बचा लो, वे लोग मुझे मार डालेंगे।)


शक पैदा करते हैं ये सवाल
वरुण के अपहरणकर्ताओं ने उसे कहां रखा, उसे पता नहीं। क्या 30 दिन में एक दिन भी वरुण की आंखों की पट्टी नहीं खोली गई?
इतने दिन अपहरणकर्ताओं ने वरुण व उसकी बाइक को कहां छुपाकर रखा? इस पर क्या आसपास के किसी व्यक्ति की नजर नहीं पड़ी ? जबकि मामला लगातार सुर्खियां में बना रहा था।


क्या बगैर चौथ लिए वरुण को अपहरणकर्ताओं ने टोल पर छोड़ा और चाबी देकर बाइक भी लौटा दी ? इसमें कितनी सच्चाई है। जबकि वरुण टोल प्लाजा पर शोर मचा सकता था और पुलिस को सूचित भी कर सकता था। क्या अपहरणकर्ता इतने लापरवाह थे ?


अगर वरुण को टोल प्लाजा पर छोड़ा गया था तो अपहरणकर्ताओं की कार व उनकी तस्वीर टोल पर सीसीटीवी में भी कैद हुई होगी। अगर ऐसा हुआ है तो क्या पुलिस सीसीटीवी देखेगी?


क्या पुलिस को वास्तव में ही नहीं पता है कि वरुण घर लौटा आया है?
क्या यह केस अपहरण का न होकर पैसे के लेनदेन का मामला है? जिस पर पुलिस भी परदा डालने में जुटी है। वरुण को चोट लगी है तो फिर उसका इलाज पानीपत में करवाने की बजाय करनाल क्यों भेजा?