समालखा। महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनवाड़ी केंद्रों पर वर्कर व हेल्पर की नौकरी पाने के लिए महिलाएं धोखाधड़ी कर रही हैं। ताजा मामला खंड के गांव हथवाला का है। जहां एक केंद्र पर हेल्पर के पद पर तैनात महिला पर स्कूली प्रमाण पत्र में हेराफेरी कर नौकरी पाने के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत सीडीपीओ को कर महिला को पद से हटाने की मांग की है। वहीं विभाग ने महिला पर लगे आरोपों की जांच शुरू कर हेल्पर को पढ़ाई के अलावा अन्य जरूरी संबंधित कागजात मांगें हैं।
इसलिए बढ़ता है हौसला
इसका मुख्य कारण है विभाग के नियमों में कमजोरी। विभाग नियुक्ति के बाद अपनी तरफ से संबंधित उम्मीदवार के कागजातों की जांच तक नहीं कराता है। वहीं पकड़े जाने पर न तो उनसे ली गई वेतन राशि को वसूला जाता है और न ही उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया जाता है। इस कारण महिलाएं नौकरी की चाह में धोखाधड़ी करने से नहीं घबराती हैं।
ये कहते हैं अधिकारी
सीडीपीओ कमला शर्मा का कहना है कि महिलाएं नौकरी पाने के लालच में धोखा कर रही हैं। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। हथवाला हेल्पर वाले मामले में ग्रामीणों की शिकायत पर जांच की जा रही है। जौरासी में वर्कर को जांच के बाद हटा दिया गया। जबकि करहंस वर्कर का मामला कोर्ट में चल रहा है।
प्रमाण पत्र में की हेराफेरी
हथवाला में एक आंगनवाड़ी केंद्र पर करीब चार साल पहले हेल्पर के पद पर नियुक्ति हुई थी। गांव के लोगों ने विभाग को दी शिकायत में बताया कि हेल्पर के पद पर तैनात महिला यूपी के एक गांव की रहने वाली है। उसकी शादी हथवाला में हुई है। महिला ने अपने गांव की ही कविता के स्कूली प्रमाण के नाम में हेराफेरी कर उसे विभाग के पास जमा कराते हुए नौकरी पाई है। वहीं विभाग ने मामले की जांच कराते हुए स्कूल से प्रमाण पत्र से संबंधित जानकारी मांगी तो ग्रामीणों द्वारा लगाए आरोप सच साबित हुए। जबकि महिला के पिता व उसके गांव के सरपंच ने शपथ पत्र देकर उक्त महिला को ही कविता बताया है। इसलिए विभाग सिर्फ प्रमाण पत्र की बजाए अन्य कागजातों की भी पूरी जांच करने में लगा है।
बेटी से मां सिर्फ 7 साल बड़ी
गांव करहंस में भी आंगनवाड़ी केंद्र पर वर्कर की नौकरी पाने के लिए एक महिला ने बारहवीं का प्रमाण पत्र जमा कराया। इसके सहारे वो नौकरी लग भी गई। ग्रामीणों की शिकायत पर विभाग ने जांच कराई तो चौकाने वाला मामला सामने आया। महिला ने जो प्रमाण पत्र जमा कराया था। उसमें दी गई जन्मतिथि के अनुसार वो अपनी सबसे बड़ी संतान से सिर्फ सात साल ही बड़ी थी। पोल खुलने पर विभाग ने महिला को नोटिस थमाया तो उसने प्रमाण पत्र में गलती होने का हवाला देते हुए यूपी के एक संस्थान से दूसरा प्रमाण पत्र दिया। संदेह के घेरे में आई महिला को विभाग ने फिलहाल हटा रखा है ओर मामला कोर्ट में चल रहा है।
बहन के सर्टिफिकेट का किया इस्तेमाल
जौरासी में आंगनवाड़ी केंद्र पर वर्कर का पद पाने के लिए महिला ने बारहवीं की योग्यता न होने पर अपनी बहन के प्रमाण पत्र व अन्य कागजातों का इस्तेमाल किया और नियुक्ति भी हो गई। महिला ने काफी समय तक काम भी किया, लेकिन जब गांव के ही किसी आदमी ने महिला की शिकायत की तो विभाग ने जांच कराई। इस पर महिला द्वारा नौकरी पाने के लिए की गई जालसाजी की पोल खुल गई और उसे वर्कर के पद से विभागीय अधिकारियों ने बर्खास्त कर दिया।