केबल नेटवर्क बिजनेस में 100 लोगों को दिया रोजगार
कभीपंचकूलामें साइकिल पर घर घर जाकर दूध बांटते थे। आज है कैबल ऑपरेटर का बिजनेस और अपने तीन मैरिज पैलेस। पैसा और शोहरत मिलने के बावजूद बर्ताव में कोई बदलाव नहीं आया है। लाइफ में उनकी सादगी, शराफत की हर कोई तारीफ करता है। वह राजनीति से भी जुड़े हैं लेकिन विवादों से दूर हैं। दिलबाग नैन का परिवार जींद जिले के जुलाना हलके का रहने वाला है। उनके पिता चाहते थे कि उनका बेटा भी गांव में रहकर खेती करे। दिलबाग को यह मंजूर नहीं था। उसकी जिद थी कि उसे सफल बिजनेसमैन बनना है। बिजनेसमैन बनने के लिए दिलबाग 1986 में लुधियाना गए। यहां उन्होंने 300 रुपए मासिक वेतन पर एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में नौकरी की। लुधियाना के पंजाब नेशनल बैंक में 5.70 करोड़ रुपए का आतंकियों की आेर से डाला गया ढाका उनकी आंखों के सामने हुआ था। वह ट्रांसपोर्ट कंपनी का चेक जमा कराने बैंक गए थे। बैंक के गेट पर आतंकी ने उनका चैक देखा और अंदर काम चलने की बात कहकर कुछ देर बाद आने लगा। बाद में पता चला कि बैंक मे आतंकियों ने ढाका डाला है। पंजाब से 1988 में चंडीगढ़ गए। उन दिनों पंचकूला तेजी से डेवलप हो रहा था। उन्होंने पंचकूला के सेक्टर 6 स्थित गवर्नमेंट प्रेस में 1989 में जॉब भी की। छह माह में ही जॉब छोड़ दी, क्योंकि वह अपना बिजनेस करना चाहते थे। उन्होंने मौलीजागरां में किराये पर जमीन लेकर भैंस रखकर डेयरी का काम शुरू किया। उन दिनों वह पहले साइकिल और बाद में राजदूत मोटर साइकिल पर घर घर जाकर दूध बांटते थे।
जीरकपुर डेराबस्सी में फैला है केबल नेटवर्क
1991में उन्होंने सेक्टर 15 में हाउसिंग बोर्ड के मकान से केबल टेलीविजन का काम शुरू किया। उन दिनों केबल टीवी का नया ही काम शुरू हुआ था। अब उनका पंचकूला के अलावा जीरकपुर, डेराबस्सी तक केबल का काम हैं। 2005 में बरवाला में रॉयल पैलेस के नाम से पहला रिजॉर्ट बनाया। इसका दूसरा पेज 2008 और तीसरा फेज 2015 में खत्म हुआ। ये तीनों मैरिज पैलेस सात एकड़ एरिया में बने हैं। अब उनके बरवाला में साथ साथ तीन मैरिज पैलेस हैं। कभी दिलबाग नैन को इस शहर में जॉब की तलाश थी। आज उन्होंने मैरिज पैलेस केबल नेटवर्क के माध्यम से करीब 100 लोगों को रोजगार दिया हुआ है। बरवाला के 20 किलोमीटर एरिया में कोई मैरिज पैलेस नहीं है। यहां मैरिज पैलेस खुलने से लोगाें को ब्याह शादी के कार्यक्रम आयोजित करने में मदद मिली हैं।
करोड़ों के मािलक दिलबाग नैन आज भी देसी गाय रखते हंै।