हुडा से 32 साल लड़े कोर्ट में, अब जीते
अमित शर्मा | पंचकूला amits.db@dbcorp.in
हुडा ने 1984 में जमीन एक्वायर की थी तो 10 मरले का प्लॉट देना था। इस प्लॉट के लिए हुडा ने इतना परेशान किया कि कुछ बता नहीं सकता। मैंने भी हार नहीं मानी, ठान लिया था कि अपने परिवार की खातिर हुडा से यह प्लॉट लेकर ही रहूंगा और सबक सीखाकर रहूंगा ताकि किसी को इस तरह परेशान किया जाए। यह कहना है 90 साल के ब्रह्मदत्त का। अपना हक पाने के लिए ब्रह्मदत्त ने हुडा के खिलाफ 32 साल कानूनी लड़ाई लड़ी। वीरवार को फैसला उनके हक में आया और कोर्ट ने हुडा के इस्टेट अफसर की गाड़ी कुर्क कर दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश मानने पर पंचकूला की एसीजेएम की कोर्ट ने हुडा के ईओ की गाड़ी को कुर्क करने के आदेश जारी किए थे।
{ साल 1984 में हुडाने एमडीसी सेक्टर-4 के लिए जमीन एक्वायर की थी। इसमें ब्रह्मदत्त की 3 कनाल जमीन भी एक्वायर किया गया। इसके बदले उसे हुडा के नियमों के तहत 10 मरले का प्लॉट मिलना है।
{साल 2003 में ब्रह्मदत्तलोअर कोर्ट में गए और यहां से 2009 में केस जीते।
{साल 2012 में हाईकोर्टमें केस जीता। 2014 में हाईकोर्ट में ही डबल बेंच ने भी ब्रह्मदत्त के हक में फैसला सुनाया।
{वर्ष 2015 में सुप्रीमकोर्ट ने भी ब्रह्मदत्त के पक्ष में फैसला सुनाया।
{अब सुप्रीमकोर्ट के आदेश मानने पर एसीजेएम भावना जैन की कोर्ट ने हुडा के ईआे की गाड़ी कुर्क की।
10 मरले के प्लॉट के लिए 32 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते ब्रह्मदत्त बुजुर्ग हो चुके हैं। अब उम्र 90 साल है पर अपना हक पाने का जज्बा बरकरार है। लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक तीन बार जीत भी हासिल की, लेकिन हुडा फिर भी उसका हक देने को तैयार नहीं है। ब्रह्दत्त ने कहा कि हुडा अफसरों को लगता है कि मेरी उम्र अब 90 साल हो चुकी है और मरने के बाद भी मुझे जमीन के एवज में प्लॉट नहीं मिल पाएगा।
कोर्ट ने ब्रह्मदत्त के लिए 254आई प्लॉट को ब्रह्मदत्त के लिए डिसाइड कर दिया था, लेकिन ब्रह्मदत्त को आउस्टीज कोटे के तहत 10 मरले का प्लॉट मिलना है, जबकि यह प्लॉट 14 मरले का है। इस पर कोर्ट ने कहा था कि जो चार मरला जमीन ज्यादा है, उसके एवज में रुपए ले लिए जाएं। ब्रह्मदत्त भी चार मरले जमीन की पेमेंट देने को तैयार हैं। इसके बावजूद हुडा प्लॉट नहीं दे रहा है। इसके चलते कोर्ट ने यह कदम उठाया है।