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एमएड में दाखिला, 1 सेमेस्टर के एग्जाम दिए, अब बाेले- अनुमति नहीं, एमए एजुकेशन की डिग्री देंगे

5 वर्ष पहले
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पांचमहीने तक पढ़ाई, एक सेमेस्टर की परीक्षा भी हो गई, अचानक विद्यार्थियों को पता चला कि वे जिस कोर्स को पढ़ रहे हैं, उन्हें उसकी नहीं बल्कि दूसरे कोर्स की डिग्री देने की तैयारी है। बात चौंकाने वाली है, मगर इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी (आईजीयू) मीरपुर में अपनी तरह का यह अजीब कारनामा सामने आया है।

यूनिवर्सिटी ने यह मजाक एमएड के विद्यार्थियों के कॅरियर के साथ किया है। विवि ने अब पलटी मारते हुए फरमान जारी कर दिया कि उन्हें एमएड की बजाय एमए एजुकेशन की डिग्री दी जाएगी। यूनिवर्सिटी द्वारा एनसीटीई (नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन) की ओर से काेर्स की अनुमति नहीं मिलने का तर्क दिया गया है। इससे विद्यार्थियों का एक साल खराब होने की नौबत भी गई है।

सिलेबसयही चलता रहेगा, डिग्री बदल जाएगी : आईजीयूद्वारा इस बार ने दर्जनभर नए कोर्स शुरू किए गए थे, जिनमें दो वर्षीय पाठ्यक्रम एमएड भी शामिल था। एमएड की परमिशन के लिए एनसीटीई की टीम ने विवि का दौरा भी किया था। इसके बाद जुलाई 2016 में विद्यार्थियों के दाखिले हो गए। इस दौरान करीब 30 छात्र-छात्राओं ने एमएड में एडमिशन लिया, जिसके लिए 12 हजार रुपए फीस भी जमा कराई गई। इन विद्यार्थियों की इसके बाद कक्षाएं भी शुरू हो गई। तक से एमएड का ही सिलेबस भी पढ़ाई जा रहा है।

रेवाड़ी. कोर्सबदलने को लेकर आपत्ति दर्ज कराने वीसी ऑफिस पहुंचे एमएड के विद्यार्थी।

...ऐसे तो कई विकल्प बंद

{एमएडपास के पास कॅरियर विकल्प ज्यादा हैं, वो स्कूलों के साथ बीएड तक को पढ़ा सकते हैं। एमए एजुकेशन में केवल इसी विषय में ही विकल्प रहता है। {यदि किसी विद्यार्थी ने पहले से एमए एजुकेशन किया है तो वह दो बार यह कोर्स क्यों करे। {विद्यार्थियों का तर्क है कि एमएड ही करनी है, तो फिर विवि अपने स्तर पर उनके कॅरियर की दिशा कैसे बदल सकता है।

...तो फीस रिफंड या कर देंगे कोर्स बंद : सालखराब होता देख विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कड़ी आपत्ति जताई। खुद वीसी से लेकर रजिस्ट्रार तक से मिले, लेकिन हल नहीं निकला। विद्यार्थियों के अनुसार उलटा नसीहत दे दी गई कि चाहें तो विद्यार्थी अपनी फीस वापस ले सकते हैं। या फिर अगले साल से इस कोर्स काे बंद भी कर सकते हैं।

^किसी भी कोर्स को शुरू करने से पहले संबंधित विभाग से अनुमति तो पहला काम है। एमएड कोर्स पर एनसीटीई की अनुमति के लिए विवि ने होमवर्क ही नहीं किया। इस कारण हो सकता है कि कोई तकनीकी खामी या संबंधित अधिकारी की चूक रह गई हो। टीम के दौरे के साथ ही परमिशन मान लेना गलत है, क्योंकि सवाल विद्यार्थियों के कॅरियर का है। जांच कर कार्रवाई तो होनी चाहिए, ताकि आगे यूं विवि पर सवाल उठें। -प्रो.आरएस यादव, सेवानिवृत शिक्षाविद।

वीसी प्रो. एसपी बंसल

सवाल: अधूरीतैयारी के साथ कोर्स कैसे शुरू किया?

जवाब-मेरीज्वाइनिंग से पहले ही कोर्स शुरू करने के लिए यहां प्लानिंग हो चुकी थी, टीम भी दौरा कर चुकी थी। इसलिए कोर्स शुरू कर दिया।

सवाल:जबपरमिशन नहीं थी तो फिर एडमिशन क्यों?

जवाब-मुझेबताया ही नहीं गया कि एनसीटीई से परमिशन नहीं मिली है। कोर्स की प्रक्रिया चल रही थी तो एडमिशन किए गए।

सवाल:अबएमएड के विद्यार्थियों के कॅरियर क्या?

जवाब-हां,कॅरियर की चिंता थी, इसलिए यूजीसी में बात की क्या हो सकता है। इसके बाद एमए एजुकेशन विकल्प दिया गया है। ये कोर्स समकक्ष भी हैं।

सवाल:कोईसमाधान निकलने की उम्मीद?

जवाब-एनसीटीईके पास अपील की है। यही, उम्मीद है कि विद्यार्थियों के कॅरियर को देखते हुए वहां विचार हो।

सवाल:चूककहां हुई, कार्रवाई होगी?

जवाब:हां,इसके लिए नोटिस दिया गया है। पता किया जाएगा कि गलती किस स्तर पर हुई है। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई भी करेंगे।

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