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डाउनलोड करेंरोहतक. नगर निगम पार्षदों के मन की मुराद पूरी हो गई है। अब पार्षदों की एनओसी के बगैर निगम प्रशासन ठेकेदार को फाइनल भुगतान नहीं करेगा। 11 नवंबर को निगम सदन की बैठक में प्रस्ताव पास होने के करीब ढाई माह बाद गुरुवार को निगम आयुक्त डा. अमित अग्रवाल ने इस आशय का पत्र नगर निगम के वित्त शाखा प्रभारी, मुख्य सफाई निरीक्षक व दोनों एक्सईन को जारी कर दिया है। साथ में एक-एक कॉपी मेयर रेणु डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा व डिप्टी मेयर अशोक भाटी सहित सभी 20 पार्षदों को भेजी गई है।
आयुक्त की ओर से जारी पत्र क्रमांक एमसीआर/2011/621-647 में स्पष्ट किया गया है अब ठेकेदारों को भुगतान करने से पहले नगर निगम प्रशासन को उस वार्ड के पार्षद से संतुष्टि प्रमाण पत्र लेना होगा, जिस क्षेत्र में विकास कार्य हुआ है। इसके लिए निगम की ओर से पार्षद को पत्र भेजा जाएगा। पार्षद को सात दिन के अंदर लिखकर देना होगा कि वह विकास कार्य की गुणवत्ता से संतुष्ट है या नहीं। अगर निर्धारित समय में पार्षद ने जवाब नहीं भेजा तो निगम प्रशासन समझ लेगा कि पार्षद कार्य से संतुष्ट है। विकास कार्य की अंतिम पेमेंट के लिए ही यह व्यवस्था की गई है।
पार्षदों की मुराद पूरी अब बढ़ेगी अहमियत
निगम के फैसले से पार्षदों की अब अहमियत बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में ठेकेदार पार्षदों को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाएंगे। अब पार्षद इस फैसले का किस नजर से देखते हैं, यह तो उनके ऊपर निर्भर हैं।
चुनावी मौसम में नाराज नहीं करना चाहती सरकार
पार्षद लंबे समय से निगम पार्षद ठेकेदार को पेमेंट देने से पहले उनसे प्रमाण पत्र देने की मांग करते रहे हैं। 11 नवंबर पार्षदों ने एजेंडा के भाग नंबर 4 में प्रस्ताव रखा था कि किसी भी विकास कार्य के बिल की अदायगी व पूर्ण कार्य मानने के लिए संबंधित पार्षद से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाए। साथ ही मेयर को बिल कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट मिलनी चाही। उस समय निगम प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया था कि प्रत्येक विकास कार्य की गुणवत्ता जांच हेतु नागरिक भागीदारी अधिनियम 2009 के अनुसार समितियों का गठन किया जाएगा। साथ में प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई थी, लेकिन ढाई माह बाद निगम प्रशासन ने पत्र जारी किया है। इससे साफ है कि चुनावी मौसम में ऊपर से हरी झंडी मिलने के बाद निगम प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।
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