बहादुरगढ़। विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता ने धार्मिक कार्यक्रमों में नेताओं के शामिल होने पर लक्ष्मण रेखा खींच दी है। नेता रामलीला, गरबा तथा विजयादशमी के कार्यक्रमों में शिरकत करने से पहले जरा ध्यान रखें, क्योंकि पूजा के बाद आरती की थाली में चढ़ाई गई राशि पर भी चुनाव आयोग की नजर रहेगी।
इतना ही नहीं इस बार शादी और बड़े सामाजिक समारोह में शिरकत करना भी उनके चुनावी खर्चे पर बोझ डाल सकता है। ऐसे में अगर आयोजक का पंडाल विशाल होगा तो उसका खर्चा नेताजी के चुनाव अकाउंट में प्लस हो सकता है। चुनाव आयोग के कैमरे नेताओं की हरकतों पर पैनी नजर रखेंगे। यदि किसी उम्मीदवार ने इसका उल्लंघन किया, तो उस पर चुनाव आयोग का रामबाण चलेगा। विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के खर्च और मतदाताओं के प्रलोभन पर नजर रखने के लिए आयोग ने 40 तरीके निकाले हैं।
आयोग की कुछ रोचक शर्तें
> धार्मिक कार्यक्रम में भाषणबाजी और वोट मांगने पर बैन।
> मुख्यातिथि तथा विशेष अतिथि के रूप में शामिल भी नहीं हो सकेंगे प्रत्याशी।
> प्रत्याशी आरती की थाली में नकद राशि चढ़ाता है, तो यह जांच का विषय।
> शादी में कन्यादान पर नजर और समारोह में पहुंचने वाले बारातियों या घरातियों से वोट मांगने पर बैन।
> प्रत्याशी के घर पहुंचने वाले दूध के पैकेट का रिकार्ड रखना जरूरी।
> न्यूज पेपर में पर्चे या पैकेट डालने पर नजर, निगरानी के दायरे में।
> सोशल मीडिया के अकाउंट और इंटरनेट का चार्ज भी बताना होगा।
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मोबाइल काल, एसएमएस और लैपटॉप की डिटेल पर भी नजर।
पांच साल कैद संभव
यदि किसी नेता ने आचार संहिता का उल्लंघन किया और इन मंचों को प्रचार माध्यम बनाना
चाहा, तो उसके ऊपर चले आयोग के रामबाण के अनुसार उसको जुर्माने के साथ पांच साल तक की कैद हो सकती है। विधानसभा सदस्यता भी रद्द की जा सकती है।
खर्च समिति बनी
उम्मीदवारों को चुनाव कार्यालय में रखे रजिस्ट्रर में प्रतिदिन के खर्चे का रिकार्ड रखना होगा। इन खर्चों का मिलान जिला स्तर पर बनाई गई एक्सपेंडिचर समिति करेंगी। चुनाव खर्च में अनियमितता पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।