शिक्षक बनना चाहती थीं कविता जैन
सोनीपत सेमौजूदा विधायक एवं भाजपा उम्मीदवार डॉ. कविता जैन कहती हैं- वह टीचर बनना चाहती थीं। जीवीएम गर्ल्स कॉलेज और सीआरए कॉलेज में जॉब के लिए आवेदन भी किया था। इसी दौरान राजीव जैन से शादी हुई। राजनीति में विशेष परिस्थितियों में प्रवेश हुआ। हालांकि पहले ऐसा माहौल मिला हुआ था, इसलिए परेशानी नहीं हुई। पिता सुरेंद्र जैन रोहतक में डॉ.मंगलसेन का कार्यालय संभालते थे। बता दें कि राजीव जैन पर आय से अिधक संपत्ति का केस चल रहा था। तब जैन ने अपनी प|ी को राजनीति में आगे किया और विधायक बनवाया। हालांकि अब यह केस खत्म हो गया है। फिर भी 39 वर्षीय कविता के मिलनसार स्वभाव की वजह से उन्हें ही दोबारा टिकट दिया गया है।
फेसबुक पर अपलोड किया गया है यह कार्टून। बीरेंद्र सिंह के कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वॉइन करने पर यह कटाक्ष किया गया है।
सावित्री को भी आना पड़ा | हिसारसे कांग्रेस की विधायक सावित्री जिंदल को भी अचानक राजनीति में आना पड़ा था। उनके पति ओमप्रकाश जिंदल की दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया। इससे पहले सावित्री घरेलू कामों में ही व्यस्त रहती थीं।
चूंकि मैं प्रोफेसर बनना चाहती थी, तो अब हसरत शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाते हुए उन्हें प्रोत्साहित करने की है।\\\' -कविताजैन
मनोहर लाल खट्टरजैसे कई नेताओं ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी या उनके कोर ग्रुप का सदस्य बताना शुरू कर दिया है। मुझे इसमें कोई सेंस समझ में नहीं आता। खट्टर जैसे वरिष्ठ नेता को पार्टी हित में ऐसे गिमिक्स से बचना चाहिए। -अश्विनीचोपड़ा, करनालसे भाजपा सांसद, (एक अखबार को दिए इंटरव्यू में। खट्टर करनाल सीट से भाजपा प्रत्याशी हैं।)
भाजपा केसांसद राव इंद्रजीत ने कोसली सीट पर अपने कांग्रेसी भाई यादुवेंद्र राव के खिलाफ प्रचार करने की मंशा जाहिर क्या की, इस सीट पर टिकट की दावेदारी ही कम हो गई। टिकट के लिए खम ठोंक रहे कई दावेदार चुपचाप साइड में हो लिए हैं। पार्टी की ‘जुबान’ कहे जाने वाले पद पर काबिज एक नेता ने तो सीनियर नेताओं तक बात पहुंचा दी है कि जब राव ही प्रचार में नहीं आएंगे, तब जीत कैसे संभव होगी। इससे तो बेहतर होगा कि राव अपने समर्थक को ही टिकट दिला दें, कम से कम हार की जिम्मेदारी तो तय हो जाएगी।